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हाई कोर्ट के स्थगन आदेश से प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत, युवाओं ने कहा- सही चयनितों को न मिले सजा

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हाई कोर्ट के स्थगन आदेश से प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत, युवाओं ने कहा- सही चयनितों को न मिले सजा


रांची, 20 अगस्त (हि.स.)। झारखंड उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के बाद जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल समेत प्रतियोगी परीक्षाओं की नियुक्तियां रद्द किए जाने से प्रभावित कर्मचारियों और अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने गुरुवार को कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद मिली नौकरी अचानक छिन जाने से उनके भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।

प्रदर्शनकारी युवाओं ने कहा कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के पक्ष में हैं। यदि किसी अभ्यर्थी ने गलत तरीके से नौकरी हासिल की है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सही तरीके से चयनित अभ्यर्थियों को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने सरकार से पूरे मामले पर मानवीय दृष्टिकोण से विचार करने की मांग की।

नम्रता महतो ने कहा कि वह अपने गांव और किसान परिवार की पहली लड़की थीं, जिन्हें अधिकारी बनने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि महज डेढ़ महीने में ही नौकरी जाने की नौबत आ गई और पहला वेतन भी नहीं मिल सका। उन्होंने सवाल किया कि सरकार का यह कैसा न्याय है।

गौरव राय ने बताया कि वह किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने डिफेंस की नौकरी छोड़कर झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी की। वर्ष 2023 में परीक्षा पास करने के बाद फरवरी 2026 में फूड सप्लाई ऑफिसर के पद पर योगदान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी पात्रता और चयन की जांच कर सकती है, लेकिन एकतरफा निर्णय लेकर नौकरी समाप्त करना उचित नहीं है।

अनुप कुमार ने बताया कि वह निजी काम करते हुए सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे। वर्ष 2024 की परीक्षा में शामिल हुए और 2026 में परिणाम आने के बाद जून में नौकरी ज्वाइन की थी। अचानक नौकरी छिन जाने से उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।

अविनाश कुमार ने कहा कि आर्थिक संघर्ष के बाद उन्हें फूड सेफ्टी ऑफिसर की नौकरी मिली थी। नौकरी छिनने के बाद वह फिर बेरोजगारी के सामने खड़े हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन मेहनत और योग्यता के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य का भी सरकार को ध्यान रखना चाहिए।

प्रदर्शनकारी युवाओं ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश से उन्हें फिलहाल राहत की उम्मीद जगी है। उन्होंने सरकार से नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार करने और वास्तविक रूप से चयनित अभ्यर्थियों को न्याय देने की मांग की।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar