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अब बिना ऑनलाइन बुकिंग नहीं मिलेगा रासायनिक उर्वरक : बीडीओ

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अब बिना ऑनलाइन बुकिंग नहीं मिलेगा रासायनिक उर्वरक : बीडीओ


देवघर, 28 सितंबर (हि.स.)। अर्णव चक्रवात के प्रभाव से हुई बारिश को सारठ प्रखंड के किसानों के लिए कृषि की दृष्टि से लाभकारी बताया जा रहा है। प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीडीओ) शशांक शेखर ने सोमवार को बताया कि वर्तमान बारिश से धान की खड़ी फसल को पर्याप्त पानी मिलने के साथ-साथ आगामी रबी मौसम में बोई जाने वाली फसलों के लिए भी खेतों में नमी बरकरार रहने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि सारठ प्रखंड में करीब 98 प्रतिशत धान और 97.5 प्रतिशत मक्के की खेती हो चुकी है। वर्तमान बारिश से दोनों फसलों को लाभ मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि फिलहाल अर्णव चक्रवात के कारण फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान होने का अनुमान नहीं है।

शशांक शेखर ने किसानों को आने वाले रबी मौसम के लिए नई उर्वरक व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल को इस वर्ष पायलट प्रोजेक्ट के तहत लागू किया जा रहा है। किसानों को उर्वरक खरीदने से पहले एफएफएस पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।

पंजीकरण के दौरान किसान को अपना आधार नंबर और जमीन का रकबा, खाता और खसरा संबंधी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके बाद पोर्टल पर किसान के नाम और भूमि विवरण के आधार पर उपलब्ध उर्वरक की मात्रा की जानकारी दिखाई देगी। इसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी जैसे उर्वरक शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत किसान को उसकी आवश्यकता के अनुरूप ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। पंजीकरण के करीब 24 घंटे बाद उर्वरक प्राप्त किया जा सकेगा।

प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने कहा कि इस नई व्यवस्था में किसान मित्रों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। किसान मित्र गांवों में घर-घर जाकर किसानों को जानकारी देंगे कि अब सीधे दुकान पर जाकर डीएपी, यूरिया या पोटाश खरीदने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण कराना होगा।

उन्होंने उर्वरक विक्रेताओं को भी निर्देशों का पालन करने की बात कही। दुकानदार किसानों से निर्धारित मूल्य लेकर उन्हें उचित मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराएं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

बीडीओ ने कहा कि एफएफएस पोर्टल का उद्देश्य किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराना और रासायनिक उर्वरकों के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करना है। उन्होंने किसानों से जैविक और प्राकृतिक खाद के अधिक से अधिक उपयोग की अपील की। साथ ही उन्होंने इस नई व्यवस्था को सफल बनाने में जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग करने का आग्रह किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy