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नेत्रदान महादान मानवता का अनुपम उपहार : निदेशक

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नेत्रदान महादान मानवता का अनुपम उपहार : निदेशक


रांची, 25 अगस्त (हि.स.)। पूरे देश के साथ झारखंड में भी 41 वां नेत्रदान पखवाड़ा 2026 के तहत कार्यक्रम का आयोजन विगत 25 अगस्त 2026 से 08 सितंबर 2026 तक मनाया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को रांची में स्वास्थ्य विभाग एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड द्वारा नेत्रदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने, समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने तथा अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने के लिए विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया।

मौके पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि नेत्रदान महादान है और यह मानवता का अनुपम उपहार है। मृत्यु के बाद दान की गई आंखें किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी ला सकती हैं। उन्होंने लोगों से नेत्रदान का संकल्प लेने, परिवार को अपनी इच्छा की जानकारी पहले से देने और दूसरों को भी प्रेरित करने की अपील की। कार्यक्रम में उन्होंने प्रतिभागियों को नेत्रदान की शपथ भी दिलाई।

उन्होंने कहा कि अभियान को केवल विभागीय कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाएगा।

विद्यालयों, महाविद्यालयों, पंचायतों, स्वास्थ्य संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों, युवा संगठनों और सामाजिक संस्थाओं को जोड़कर इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया जाएगा।

निदेशक, प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं डॉ सिद्धार्थ सान्याल ने नेत्रदान को किसी के अंधकारमय जीवन में प्रकाश देने का संकल्प बताया। राज्य अंधापन नियंत्रण पदाधिकारी डॉ पंकज कुमार ने कहा कि कॉर्नियल अंधत्व के कुछ मामलों में कॉर्निया प्रत्यारोपण से दृष्टि लौटाई जा सकती है, जिसके लिए दान किए गए कॉर्निया की उपलब्धता जरूरी है।

सिविल सर्जन डॉ अमरेंद्र प्रसाद ने कहा कि नेत्रदान की इच्छा जीवनकाल में व्यक्त की जा सकती है, जबकि नेत्र प्राप्ति मृत्यु के बाद निर्धारित चिकित्सकीय एवं कानूनी प्रक्रिया से होती है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और चिकित्सक मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar