झारखंड टेंडर घोटाला मामले में ईडी ने 14 नए इंजीनियरों को बनाया आरोपित, दाखिल की चार्जशीट
रांची, 18 मार्च (हि.स.)।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची जोनल ऑफिस ने पीएमएलए ( पीएमएलए) की विशेष अदालत में इस मामले की 5वीं पूरक शिकायत (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) दर्ज की है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार
इस कार्रवाई में विभाग के 14 बड़े अधिकारियों और इंजीनियरों को नया आरोपित बनाया गया है, जिसके बाद इस केस में कुल आरोपितों की संख्या 36 हो गई है।
ईडी ने दाखिल चार्जशीट में जिन्हें आरोपित बनाया है, उनमें सेवानिवृत्त मुख्य इंजीनियर सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार व प्रमोद कुमार तथा कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राज कुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार व अनिल कुमार (सेवानिवृत्त) के अलावा सहायक अभियंता राम पुकार राम व रमेश ओझा (दोनों सेवानिवृत्त) इनके साथ पूर्व अधीक्षण अभियंता/मुख्य अभियंता उमेश कुमार (सेवानिवृत्त) शामिल हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच के क्रम में ईडी ने पाया है कि ये इंजीनियर टेंडर आवंटन में अवैध तरीके से कमीशन की वसूली में लिप्त थे। वे कमीशन वसूले, जमा किया और उसे सभी संबंधितों, सीनियरों तक पहुंचाया।
ये सभी आरोपित इंजीनियर झारखंड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र व झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण से संबद्ध रहे हैं।
ईडी ने पीएमएलए की रांची स्थित विशेष अदालत को बताया कि ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र व झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के भीतर एक सुनियोजित कमीशन, रिश्वत का रैकेट चल रहा था। इसके तहत टेंडर आवंटन के बदले ठेकेदारों से कुल टेंडर मूल्य का तीन प्रतिशत निश्चित कमीशन वसूला जाता था।
इस कमीशन का बंटवारा होता था। इसमें 1.35 प्रतिशत राशि तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम को उनके निजी सचिव संजीव लाल के माध्यम से जाता था।
इसके अलावा 0.65 प्रतिशत से एक प्रतिशत राशि विभागीय सचिव को व शेष राशि मुख्य इंजीनियरों तथा उनके अधीनस्थ इंजीनियरों को दी जाती थी। ईडी ने कोर्ट को बताया है कि करीब 3048 करोड़ रुपये के कुल टेंडर आवंटन में अपराध की आय से 90 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति आरोपितों ने अर्जित की है।
ईडी ने एसीबी जमशेदपुर में दर्ज कांड संख्या 13/2019 के आधार पर इंफॉर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज किया था। यह मामला एक जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा की दस हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तारी से जुड़ा हुआ था।
एसीबी ने तब तलाशी के दौरान तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र कुमार राम के ठिकाने से 2.67 करोड़ रुपये नकदी की बरामदगी की थी। ईडी ने जांच के क्रम में वीरेंद्र कुमार राम के भ्रष्टाचार की कमाई को उजागर किया था और बताया था कि ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन में कमीशन से वीरेंद्र कुमार राम ने करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की थी।
जांच के दौरान ईडी ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम तक पहुंची थी और कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में बताया था कि मंत्री तक टेंडर आवंटन में एक निश्चित राशि कमीशन में मिलती थी। मंत्री आलमगीर आलम के लिए कमीशन की राशि की वसूली में उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल व उनके अन्य सहयोगी जुड़े थे।
ईडी ने दाखिल चार्जशीट में कोर्ट को बताया है कि इस मामले में अब तक ईडी ने झारखंड, दिल्ली व बिहार में 52 जगहों पर तलाशी ली है। इस केस में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल, संजीव कुमार लाल के सहायक जहांगीर आलम अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं।
तीन अस्थाई जब्ती के माध्यम से ईडी अब तक 44 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर चुकी है। इसपर एडजुकेडिंग अथारिटी की मंजूरी भी मिल चुकी है। ईडी ने लगभग 38 करोड़ रुपये नकदी भी जब्त कर चुकी है। इनमें संजीव कुमार लाल के ठिकाने से 32.20 करोड़ रुपये, ठेकेदार मुन्ना सिंह के ठिकाने से 2.93 करोड़ रुपये शामिल हैं।
इसके साथ ही ईडी ने आठ लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की हैं। इससे पहले इस मामले में ईडी ने न्यायालय के सामने एक मुख्य चार्जशीट व चार पूरक चार्जशीट दाखिल की थी, जिसपर न्यायालय ने संज्ञान ले लिया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

