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संताल परगना में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ माकपा का आंदोलन तेज, मई में दुमका आयुक्त कार्यालय घेराव का ऐलान

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संताल परगना में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ माकपा का आंदोलन तेज, मई में दुमका आयुक्त कार्यालय घेराव का ऐलान


रांची, 29 अप्रैल (हि.स.)। संताल परगना के जनजातीय इलाकों में कथित भूमि अधिग्रहण, संवैधानिक अधिकारों के हनन और कॉरपोरेट-राज्य गठजोड़ के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (माकपा) ने बड़ा आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। पार्टी ने मई के तीसरे सप्ताह में दुमका आयुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

माकपा का आरोप है कि संताल परगना के आदिवासी क्षेत्रों में जिला प्रशासन, जिला खनन पदाधिकारी (एमडीओ) और स्थानीय दलालों की मिलीभगत से वनाधिकार अधिनियम (एफआरए), पेसा कानून और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी एक्ट) का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि ग्राम सभाओं की अनुमति के बिना सर्वेक्षण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चलाई जा रही है, जो पूरी तरह असंवैधानिक और अवैध है।

बुधवार को माकपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से बातचीत की और जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव, राज्य सचिव मंडल सदस्य सुरजीत सिन्हा, राज्य कमेटी सदस्य सुभाष हेम्ब्रम, अमल आजाद और जिला सचिव देवी सिंह पहाड़िया शामिल थे।

पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रशासन ग्राम सभाओं की सर्वोच्चता को नजरअंदाज कर ग्रामीणों पर दबाव बना रहा है। बिना सहमति के जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चलाना न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि यह आदिवासी समुदायों के पारंपरिक और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

माकपा ने यह भी आरोप लगाया कि जिले में वनाधिकार से संबंधित दर्जनों आवेदन वर्षों से लंबित पड़े हैं। उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद लंबित दावों, विशेषकर पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) के मामलों का निपटारा किए बिना जबरन विस्थापन की तैयारी की जा रही है। पार्टी ने इसे पूरी तरह गैरकानूनी और अन्यायपूर्ण बताया।

इस बीच प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर स्थानीय प्रधानों को 10 दिनों के भीतर औपचारिक ग्राम सभा बुलाने का अल्टीमेटम दिया है। ग्रामीण चाहते हैं कि वन अधिकार समिति का गठन हो और नए दावों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।

ग्राम सभा की कार्यवाही, प्रस्ताव और दस्तावेजों को राज्यपाल, राष्ट्रपति और उच्च न्यायालय को साक्ष्य के रूप में भेजने की तैयारी की जा रही है। साथ ही एक विशेष उपसमिति का गठन भी किया गया है, जो ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने और कानूनी लड़ाई की निगरानी करेगी।

माकपा ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने जनजातीय अधिकारों की रक्षा और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई, तो मई के तीसरे सप्ताह में दुमका आयुक्त कार्यालय के समक्ष हजारों ग्रामीणों की भागीदारी के साथ जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। पार्टी ने इसे आदिवासी अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की निर्णायक लड़ाई बताया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak