वेटलैंड क्षेत्रों के संरक्षण, सीमांकन और बेहतर प्रबंधन आवश्यक : मुख्यमंत्री
रांची, 24 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में सोमवार को झारखंड मंत्रालय में झारखंड राज्य आद्रभूमि (वेटलैंड) प्राधिकरण की बैठक हुई। इसमें राज्य के वेटलैंड क्षेत्रों के संरक्षण, सीमांकन और बेहतर प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप राज्य में अवस्थित आद्रभूमि (वेटलैंड) को चिन्हित करने, उनका गहन अध्ययन एवं व्यवस्थित दस्तावेजीकरण कराने और डिमार्केशन के बाद नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।
उन्होंने राज्य की सभी आद्रभूमि की सूची तैयार करने और उसका नियमित अद्यतन, आद्रभूमि का डेटाबेस विकसित तथा संधारित करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संभावित वेटलैंड की पहचान से लेकर सत्यापन, डिमार्केशन, नोटिफिकेशन, दस्तावेजीकरण और मैनेजमेंट प्लान तक की प्रक्रिया राज्य के प्राकृतिक जल क्षेत्रों को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वेटलैंड जल क्षेत्र के साथ-साथ राज्य की जैव विविधता, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी के महत्वपूर्ण आधार हैं।
इनके संरक्षण के लिए गहण अध्ययन और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रभावी मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने वेटलैंड की वर्तमान स्थिति, जल स्रोत, आसपास की गतिविधियों और समय के साथ हुए बदलावों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने पर बल दिया।
बैठक में राज्य के पर्यावरण, जल स्रोतों और जैव विविधता के संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य की सभी प्रमुख आर्द्रभूमियों के संरक्षण, सीमांकन और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिया। उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, जल संसाधन विभाग, नगर विकास विभाग तथा भूमि राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करना और जल संकट से निपटने के लिए प्राकृतिक जल निकायों का जीर्णोद्धार करना है।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इसरो से प्राप्त एटलस के आधार पर झारखंड में 2119 संभावित वेटलैंड की सूची प्राप्त हुई है। अब इन संभावित स्थलों का जिला स्तरीय आद्रभूमि समितियों की ओर से भौतिक एवं तथ्यात्मक सत्यापन किया जाएगा। साथ ही आद्रभूमि नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने, अतिक्रमण की रोकथाम, गतिविधियों का विनियमन और राज्य आद्रभूमि प्राधिकरण को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जायेगा। इसके बाद राज्य स्तरीय कमेटी की ओर से वेटलैंड की पहचान एवं सीमांकन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। बैठक में स्पष्ट किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए चिन्हित वेटलैंड का डिमार्केशन कर नोटिफिकेशन किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक महत्वपूर्ण वेटलैंड के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए आवश्यकतानुसार मैनेजमेंट प्लान तैयार करने का निर्देश दिया।
बैठक में झारखंड राज्य आद्रभूमि प्राधिकरण के प्रभावी संचालन से जुडेन विभिन्न प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इनमें टेंडर एवं प्रोक्योरमेंट डॉक्यूमेंट की स्क्रीनिंग और टेंडर अनुमोदन के लिए समिति के गठन का प्रस्ताव के अतिरिक्त तकनीकी समिति के गठन तथा जनता से प्राप्त शिकायतों की सुनवाई कर, उन्हें अनुशंसा के साथ राज्य आद्रभूमि प्राधिकरण के समक्ष अंतिम निर्णय के लिए अग्रसारित करने संबंधी समिति के गठन पर भी चर्चा हुई।
वहीं, प्राधिकरण के कार्यालय के संचालन के लिए आवश्यक राशि का प्रावधान, पर्याप्त बजट एवं मानव संसाधन की उपलब्धता और आद्रभूमि संरक्षण एवं प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित प्रस्तावों पर भी विस्तार से विमर्श किया गया।
बैठक में संबंधित अधिकारी मौजूद थे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

