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झारखंड विधानसभा: पोटका में बारिश से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने उठा मुद्दा, खाली सरकारी पदों पर भी गरमागरम बहस

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झारखंड विधानसभा: पोटका में बारिश से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने उठा मुद्दा, खाली सरकारी पदों पर भी गरमागरम बहस


रांची, 09 मार्च (हि.स.)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन सोमवार को एक ओर जहां पोटका विधानसभा क्षेत्र में भारी बारिश से प्रभावित परिवारों को मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा सदन में उठा। वहीं, दूसरी ओर राज्य में बड़ी संख्या में खाली पड़े सरकारी पदों को लेकर भी सदन में तीखी बहस देखने को मिली।

पोटका से विधायक जगत मांझी ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से कहा कि वर्ष 2025-26 में भारी बारिश के कारण उनके विधानसभा क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ था। मुआवजे के लिए कुल 684 आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन अब तक किसी भी आवेदक को राहत राशि नहीं मिली है। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन आवेदनों की स्वीकृति कब तक होगी और प्रभावित परिवारों को मुआवजा कब दिया जाएगा।

इस पर जवाब देते हुए मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि पोटका क्षेत्र में भारी बारिश से व्यापक क्षति हुई थी। उपायुक्त द्वारा कराए गए आकलन के आधार पर 335 परिवारों को चिन्हित किया गया था और उन्हें नियमानुसार मुआवजे का भुगतान कर दिया गया है। बाकी आवेदनों के संबंध में उन्होंने कहा कि यदि ऐसे पात्र लोगों की सूची सामने आती है, जिन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला है, तो सरकार उन्हें भी राहत राशि उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है और धन की कोई कमी नहीं है।

सदन की कार्यवाही के दौरान राज्य में खाली पड़े सरकारी पदों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में स्वीकृत 3,51,000 पदों के मुकाबले लगभग 1,54,000 पद खाली हैं, जो करीब 45 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां होने से सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या विभागों से अधियाचना नहीं आने के कारण ये पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।

विधायक तिवारी ने कहा कि ये पद पुराने समय में जनसंख्या के अनुपात में स्वीकृत किए गए थे और इनके खाली रहने से योजनाओं के क्रियान्वयन और बजट खर्च पर भी असर पड़ रहा है।

इस पर मंत्री दीपक बिरुवा ने कहा कि सरकार वित्त विभाग के आंकड़ों को आधार मानती है, क्योंकि एचआरएमएस के आंकड़ों में कभी-कभी त्रुटि हो सकती है। उन्होंने बताया कि सरकार झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से लगातार नियुक्तियां कर रही है। जैसे ही विभागों से अधियाचना प्राप्त होती है, उसी के आधार पर विज्ञापन जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है।

इस मामले पर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नियुक्तियों के निर्धारण में वित्त विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई पद पिछले 20 से 25 वर्षों से खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में वर्तमान सरकार मानव संसाधन के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और अब तक 30 हजार से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं। सरकार अपने संसाधनों के अनुसार बैकलॉग को भरने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे