पंचायतों को सशक्त बनाकर अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री
रांची, 27 मई (हि.स.)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बुधवार को झारखंड मंत्रालय में ग्रामीण विकास विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की समीक्षा की। बैठक में विभागीय अधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि ग्राम पंचायतें राज्य के समग्र विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। पंचायतों को मजबूत बनाकर ही ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति तेज की जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण विकास विभाग की सभी योजनाओं का पारदर्शी, समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में अबुआ आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर आवास योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लाभुकों की पहचान में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवार जो अभी भी आवासविहीन हैं या जर्जर मिट्टी के घरों में रहने को मजबूर हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं का लाभ दिया जाए। साथ ही सभी आवास योजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन समिति (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी)-(जेएसएलपीएस) को महिला स्वयं सहायता समूहों के विस्तार पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की अहम भूमिका है। महिलाओं को खेती तक सीमित रखने के बजाय सोलर पावर उत्पादन, स्वरोजगार और अन्य आधुनिक गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की मैपिंग कर उन्हें बाजार उपलब्ध कराया जाए। इस जिम्मेदारी को डीपीएम और बीपीएम स्तर के अधिकारियों को सौंपने का निर्देश दिया गया। साथ ही राज्य के बाहर प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों पर भी पलाश मार्ट जैसे बिक्री केंद्र स्थापित करने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि रांची के कांके रोड में निर्माणाधीन नया पलाश मार्ट अंतिम चरण में है। इसके अलावा इस वर्ष छह नए पलाश मार्ट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले वर्षों में राज्य के सभी जिलों में पलाश मार्ट भवन विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने पशुधन आधारित योजनाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद उपयोगी बताते हुए इनका लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का निर्देश दिया। उन्होंने जुट प्रोसेसिंग और शहद उत्पादन के क्षेत्र में संभावनाओं को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में महिलाओं को जोड़कर रोजगार और आय के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 'मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना' से जुड़ी महिलाओं, दिव्यांग महिलाओं, वृद्ध महिलाओं और विधवा महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाए। साथ ही एसएचजी की महिलाओं को नवाचार और आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने तथा क्लस्टर स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित कर योजनाओं की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ‘दीदी कैफे’ संचालित करने की दिशा में भी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।
लिफ्ट इरिगेशन परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर बैठकें आयोजित कर ग्रामीणों को वाटर मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण पर प्रभावी कार्य किए बिना लिफ्ट इरिगेशन परियोजनाओं को सफल नहीं बनाया जा सकता, इसलिए जल संचय से जुड़ी योजनाओं को गति देने की जरूरत है।
बैठक में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल कार्यक्रम, बिरसा विशिष्ट जनजातीय विकास योजना, युवा कौशल योजना तथा वाटरशेड योजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई।
इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव मनोज कुमार, ग्रामीण विकास आयुक्त मृत्युंजय कुमार वर्णवाल तथा जेएसएलपीएस के मुख्य कार्यपालक अनन्या मित्तल सहित कई वरीय अधिकारी मौजूद थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

