मुख्यमंत्री ने राज्य में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण का दिया निर्देश
रांची, 01 जून (हि.स.)। झारखंड मंत्रालय में सोमवार को मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में परिवहन विभाग तथा राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई।
बैठक में विभागीय कार्यप्रणाली, योजनाओं की अद्यतन प्रगति और लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने आमजन को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि सभी विभाग अपनी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के
लिए तकनीक का व्यापक उपयोग करें। उन्होंने परिवहन सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और भूमि संबंधी मामलों के त्वरित निष्पादन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिया।
राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य में भूमि अभिलेखों के व्यापक और चरणबद्ध डिजिटलीकरण को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने पर आम नागरिकों को भूमि क्रय से पूर्व संबंधित भूमि की स्थिति के संबंध में संपूर्ण और अद्यतन जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर सहज रूप से उपलब्ध हो सकेगी। नागरिक यह जान सकेंगे कि संबंधित भूमि सरकार की ओर से अधिग्रहण-अर्जन की प्रक्रिया में है, अधिग्रहित की जा चुकी है या पूर्णतः मुक्त है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से रैयतों एवं आमजनों को पारदर्शी और विश्वसनीय जानकारी प्राप्त होगी, जिससे भूमि क्रय-विक्रय से संबंधित अनिश्चितता और विवादों में उल्लेखनीय कमी आएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि भूमि संबंधी सभी महत्वपूर्ण अभिलेखों को डिजिटलीकृत कर उन्हें एकीकृत पोर्टल से जोड़ा जाए, ताकि किसी भी स्तर पर सूचना के अभाव या विसंगति की स्थिति उत्पन्न न हो।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने अधिग्रहित भूमि के संबंधित विभागों और उपयोगकर्ता एजेंसियों को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से हस्तांतरण की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण के माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और भूमि से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक सुगम एवं प्रभावी बनेंगी।
मुख्यमंत्री ने खासमहल भूमि से संबंधित लीज नवीनीकरण, लीज हस्तांतरण और भूमि के प्रयोजन परिवर्तन (चेंज ऑफ लैंड यूज़) की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में जटिलताओं के कारण आमजनों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिसे दूर करना आवश्यक है। इस दिशा में सभी प्रक्रियाओं का मानकीकरण करते हुए उन्हें ऑनलाइन एवं ट्रैकिंग-आधारित प्रणाली से जोड़ने पर भी बल दिया गया, ताकि आवेदनों की स्थिति की निगरानी सुगमता से की जा सके।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि खासमहल अंतर्गत सभी लीजधारकों का व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण और मैपिंग कराया जाए, जिससे प्रत्येक लीजधारक का अद्यतन डाटाबेस तैयार हो सके। इसके साथ ही, सभी लीज से संबंधित दस्तावेजों का पुनः सत्यापन (री-वेरिफिकेशन) सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी प्रकार की विसंगति, फर्जीवाड़ा या अभिलेखीय त्रुटियों को समय रहते चिन्हित कर सुधारा जा सके। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया भविष्य में भूमि प्रबंधन को अधिक सुदृढ़ और विश्वसनीय बनाएगी।
परिवहन विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सुविधा मिल सके। मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिलावार मैपिंग, रूट चार्ट निर्माण एवं सड़क नेटवर्क के विकास पर जोर दिया गया।
रांची स्मार्ट सिटी में विकसित किए जा रहे ट्रैफिक पार्क के प्रजेंटेशन का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री ने वहां उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यह पार्क आमजन, विशेषकर बच्चों और युवाओं को मनोरंजन के माध्यम से यातायात नियमों, संकेतों एवं सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने जमशेदपुर में स्थापित किए जा रहे इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइवर ट्रेनिंग एंड रिसर्च (आईडीटीआर) की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण रूप से क्रियाशील बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस संस्थान के माध्यम से व्यावसायिक एवं प्रशिक्षित चालकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और दुर्घटनाओं में कमी लाने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता तथा प्रशिक्षुओं के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण की व्यवस्था को प्राथमिकता देने पर बल दिया।
इसी क्रम में धनबाद में विकसित किए जा रहे वाहन निरीक्षण और प्रमाणन केंद्र की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इस केंद्र को अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित किया जाए, ताकि वाहनों की फिटनेस जांच पारदर्शी, सटीक और मानकीकृत तरीके से की जा सके। उन्होंने कहा कि इससे प्रदूषण नियंत्रण, सड़क सुरक्षा तथा वाहन मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
बैठक में विभागीय मंत्री दीपक बिरुआ, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभागीय सचिव राजीव रंजन सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

