home page

डिजिटल माध्यमों के सशक्त उपयोग से शासन में पारदर्शिता बढ़ेगी: मुख्यमंत्री

 | 
डिजिटल माध्यमों के सशक्त उपयोग से शासन में पारदर्शिता बढ़ेगी: मुख्यमंत्री


रांची, 22 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बुधवार को झारखंड मंत्रालय में सूचना प्रौद्योगिकी और ई-गवर्नेंस विभाग के अद्यतन कार्यों एवं विभिन्न योजनाओं की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में ई-गवर्नेंस परियोजनाओं, डिजिटल सेवाओं के विस्तार, साइबर सुरक्षा, डेटा प्रबंधन, सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण तथा आईटी आधारित नवाचारों की विस्तृत समीक्षा की गई।

इस दौरान “डिजिटल झारखंड विजन 2029” पर विशेष चर्चा हुई, जिसमें अधिकारियों ने आईटी पार्क निर्माण की रूपरेखा एवं साइट प्लान प्रस्तुत किया और मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। साथ ही “चीफ मिनिस्टर डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म” के विकास पर भी विचार-विमर्श हुआ, जिसके माध्यम से सभी विभागों के डेटा एवं पोर्टलों का समेकित आकलन किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रत्येक विभाग एवं प्रत्येक जिले में आईटी अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़े। उन्होंने सभी विभागों के डेटा को केंद्रीकृत प्रणाली में एकीकृत करने पर बल दिया, जिससे बेहतर समन्वय और निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके। बैठक में झारखंड स्टेट डेटा सेंटर को सुदृढ़ बनाने तथा डेटा की सुरक्षा एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने पर भी चर्चा की गई।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा, “डिजिटल झारखंड का सपना तभी साकार होगा, जब तकनीक का लाभ राज्य के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंचे। इसके लिए यह आवश्यक है कि डिजिटल सेवाओं का विस्तार अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित किया जाए, ताकि कोई भी नागरिक सूचना और सेवाओं से वंचित न रहे। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को नवाचार, पारदर्शिता और दक्षता के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक आम लोगों के जीवन को सरल, सुलभ और सुगम बनाए।

उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक तकनीकों के समुचित उपयोग से न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक सुदृढ़ और जवाबदेह बनेगी, बल्कि सेवा वितरण प्रणाली में भी गति आएगी। डिजिटल माध्यमों के सशक्त उपयोग से शासन में पारदर्शिता बढ़ेगी, योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार होगा और राज्य को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ठोस एवं स्थायी प्रगति सुनिश्चित की जा सकेगी।

जैप-आईटी की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने संस्थान में रिक्त पदों को भरने के निर्देश दिए, ताकि विभागीय कार्यों की गति और दक्षता में वृद्धि हो सके। इसके साथ ही पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी नेटवर्क, लाइडर तथा सैटेलाइट आधारित परियोजनाओं की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई और इन परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने पर बल दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक सुशासन का एक सशक्त और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी विभाग अपनी सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ें, ताकि आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं की जानकारी और लाभ सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से प्राप्त हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का उद्देश्य प्रशासन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागों में फोटोयुक्त डिजिटल सक्सेशन चार्ट तैयार कर उसे नियमित रूप से अपडेट रखने के निर्देश दिए, जिससे अधिकारियों की पहचान और प्रशासनिक स्पष्टता बनी रहे। उन्होंने राज्य के सभी विभागों के डेटा को एक समान प्रारूप में केंद्रीकृत करने तथा अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा तंत्र विकसित करने पर जोर देते हुए नियमित सुरक्षा ऑडिट सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

राज्य में डिजिटल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने इंटरनेट शैडो क्षेत्रों (जहां नेटवर्क उपलब्ध नहीं है या अत्यंत कमजोर है) की पहचान कर चरणबद्ध तरीके से नेटवर्क विस्तार करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य का कोई भी गांव, कस्बा या शहर डिजिटल सेवाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक क्षेत्र तक 5जी इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए ठोस एवं समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा, ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासनिक सेवाओं एवं डिजिटल शासन को नई गति मिल सके।

बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री मंईंयां सम्मान योजना की प्रगति से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि योजना के पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों की संख्या, उनकी जांच प्रक्रिया और अब तक पात्र लाभुकों को किए जा रहे आधार-आधारित भुगतान की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। इस संबंध में अधिकारियों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता एवं समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के

लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं की रूपरेखा भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई। मुख्यमंत्री ने सभी जिला न्यायालयों में उच्च गुणवत्ता वाले साउंड सिस्टम स्थापित करने के सुझाव दिए, ताकि न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं एवं वादकारियों के बीच संवाद अधिक स्पष्ट, सुगम और प्रभावी हो सके तथा न्यायिक कार्यों में दक्षता सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभागीय सचिव पूजा सिंघल, विशेष सचिव सुनील कुमार सिंह, निदेशक आईटी माधवी मिश्रा, सीईओ जैप-आईटी चंदन कुमार और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे