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बाल संरक्षण प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए क्षमता संवर्धन कार्यक्रम

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बाल संरक्षण प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए क्षमता संवर्धन कार्यक्रम


दुमका, 30 सितंबर (हि.स.)। जिला विधिक सेवा प्राधिकार और गैर सरकारी संस्था, प्रवाह के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को न्याय सदन भवन में बाल संरक्षण प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जज सुधांशु कुमार शशि, फैमिली जज योगेश्वर मनी, डीजे वन, प्रकाश झा, एसपी पीतांबर सिंह खेरवार और संस्था सचिव दिलीप कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण से संबंधित विभिन्न कानूनों, योजनाओं एवं संस्थागत व्यवस्थाओं के संबंध में संबंधित हितधारकों की समझ एवं क्षमता को सुदृढ़ करना था, ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें समय पर आवश्यक सहायता एवं संरक्षण उपलब्ध कराया जा सके।

कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बाल अधिकार, बाल संरक्षण तंत्र, बाल विवाह, बाल श्रम, बच्चों के साथ होने वाली हिंसा एवं शोषण की रोकथाम सहित अन्य विधिक मामलों की जानकारी दी। प्रशिक्षण में रिसोर्स पर्सन संजय उपाध्याय द्वारा कर्तव्यधारकों, सेवा प्रदाताओं एवं सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों, संस्थाओं एवं समुदाय के बीच समन्वय आवश्यक है। किसी भी बच्चे के साथ अधिकारों का उल्लंघन होने की स्थिति में त्वरित कार्रवाई और उचित संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वहीं डालसा के प्रतिनिधियों ने बच्चों को निःशुल्क विधिक सहायता, उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक सेवा तंत्र के बारे में भी जानकारी दी।

कार्यक्रम के माध्यम से बाल संरक्षण प्रणाली को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाने तथा बच्चों के सुरक्षित और अधिकारपूर्ण वातावरण के निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम में संबंधित विभागों के पदाधिकारी, सेवा प्रदाता, सामुदायिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता सहित अन्य संबंधित हितधारक उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / नीरज कुमार