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शरीर तो अग्नि को सौंप दिया, पर कैसे छोड़ जाएं बड़े भाई को अकेला: मुख्यमंत्री

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शरीर तो अग्नि को सौंप दिया, पर कैसे छोड़ जाएं बड़े भाई को अकेला: मुख्यमंत्री


रांची, 06 सितंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने बेहद करीबी, सहयोगी और बड़े भाई समान मित्र झारखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। अंतिम विदाई के दौरान मुख्यमंत्री अपने आंसुओं को रोक न सके। मुख्यमंत्री ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए उन्होंने इस क्षति को अपनी व्यक्तिगत और अपूरणीय क्षति बताया।

सोरेन ने सोशल मीडिया एक्स पर रविवार को लिखा है कि मन मानने को तैयार नहीं है कि सोनू भैया अब हमारे बीच नहीं हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में लिखा कि सोनू भैया के जाने से लगा जैसे समय ठहर सा गया हो। उन्होंने कहा, “मन मानने को तैयार ही नहीं है कि सोनू भैया अब हमारे बीच नहीं हैं। अंतिम विदाई के उस क्षण में ऐसा लगा कि वक्त रुक गया है। आंखों के सामने उनकी मुस्कुराती हुई छवि, उनका स्नेह और उनका अपनापन बार-बार तैर रहा है।

अपने और सोनू के आपसी संबंधों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ रिश्ते किसी नाम या औपचारिकता के मोहताज नहीं होते। उनके लिए सोनू भैया का साथ भी कुछ ऐसा ही था, जहां उन्हें एक बड़े भाई का सच्चा स्नेह और एक दोस्त का अपनापन एक साथ मिला। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “उनसे जुड़ी यादें आज मन को भीतर तक भिगो रही हैं। शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया, लेकिन उनका स्नेह, उनकी बातें, उनका संघर्ष और उनके साथ बिताया हर पल हमारे बीच हमेशा जीवित रहेगा।

अंतिम संस्कार के दौरान अपने मित्र को दी गई विदाई का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा, “भैया, आपको विदा तो कर दिया, लेकिन यह दिल कैसे मान ले कि अब आप हमारे साथ नहीं हैं। आपकी कमी हमेशा खलेगी और आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।

मुख्यमंत्री दिवंगत मंत्री सुदिव्य को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, अंतिम यात्रा में हुए शामिल

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन रविवार को गिरिडीह के हरसिंहरायडीह स्थित दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार के आवास पहुंचे। मुख्यमंत्री ने सुदिव्य कुमार के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा शोक-संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री सुदिव्य कुमार की अंतिम यात्रा में भी शामिल हुए। उन्होंने पार्थिव शरीर को कंधा देकर श्मशान घाट तक पहुंचाया तथा दाह संस्कार में सम्मिलित होकर दिवंगत मंत्री को अंतिम विदाई दी। सुदिव्य कुमार का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देर रात हृदयाघात के कारण सुदिव्य कुमार का आकस्मिक निधन हो गया। यह सरकार और पूरे राज्य के लिए अत्यंत दुखद घड़ी है। उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अत्यंत सक्रिय रहे और परिपक्वता एवं गंभीरता के साथ उन्होंने अनेक विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका असमय निधन अत्यंत पीड़ादायक है और विश्वास करना कठिन है कि वे अब हमारे बीच नहीं हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी अंतिम यात्रा में सरकार और मंत्रिमंडल के सभी लोग उपस्थित होकर उन्हें अंतिम विदाई दे रहे हैं।

उन्होंने ईश्वर से शोक-संतप्त परिवार को इस कठिन समय में दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस दुःख की घड़ी में सुदिव्य कुमार के परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और आगे भी परिवार के प्रति सरकार का सहयोग एवं संबल बना रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदिव्य कुमार का आकस्मिक निधन झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उनके निधन से राज्य ने एक कर्मठ जनप्रतिनिधि, समर्पित मंत्री और युवा नेतृत्व को खो दिया है। उनके योगदान को राज्य सदैव स्मरण करता रहेगा।

मौके पर विधायक कल्पना सोरेन ने भी स्वर्गीय सुदिव्य कुमार के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोक-संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की तथा ईश्वर से इस कठिन समय में परिवार को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

स्वर्गीय सुदिव्य कुमार की अंतिम यात्रा में मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, विधायक, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, राज्य सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी, गिरिडीह जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक तथा बड़ी संख्या में उनके समर्थक एवं चाहने वाले शामिल हुए। अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे और नम आंखों से अपने प्रिय जनप्रतिनिधि को अंतिम विदाई दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे