सीबीआई के वकील ने रांची के ट्रैफिक एसपी पर लगाया अभद्र व्यवहार करने का आरोप, डीजीपी से शिकायत
रांची, 12 अगस्त (हि .स.)। सीबीआई के अधिवक्ता दविंदर पाल सूद ने रांची के ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह के खिलाफ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है
उन्होंने इस संबंध में बुधवार को डीजीपी को पत्र लिखकर इसकी शिकायत की है। सूद ने आरोप लगाया है कि ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने उन्हें धमकाया और सीबीआइ जैसी प्रतिष्ठित संस्था का अपमान किया।
दविंदर पाल सूद ने अपनी शिकायत में बताया कि 10 अगस्त 2026 की शाम को वे सीबीआई की विशेष अदालत में पेशी निपटाकर अपने कार्यालय लौट रहे थे। इस दौरान रांची में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के कारण सडक पर भारी जाम की स्थिति थी।
पत्र के अनुसार राजभवन का रास्ता पूरी तरह से बंद था, इसलिए उन्हें रातू चौक के पास जज कालोनी रोड की ओर मुड़ना पड़ा। वहां भी एक तरफ से सड़क बंद थी, लेकिन बगल की गली से पुलिस वाहनों को गुजरने दिया जा रहा था। उन्होंने वहां तैनात एक ट्रैफिक कर्मी से बगल की गली से गुजरने की अनुमति मांगी, लेकिन उन्हें बड़े अधिकारियों से अनुमति लेने को कहा गया।
सूद ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह से विनम्रतापूर्वक अनुमति मांगी और अपनी पहचान बताई, तो एसपी ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए कहा, 'ये रास्ता पुलिस वालों के लिए है। तेरे लिए नहीं है। जब सूद ने कहा कि सीबीआई भी केंद्रीय पुलिस संगठन का हिस्सा है, तो एसपी ने कथित तौर पर कहा, 'तू जो भी है मुझे क्या लेना, बोल दिया ना तुझे बड़ा आया सेंटर वाला।
पत्र के अनुसार, जब उन्होंने विरोध जताया तो एसपी ने मुक्का दिखाते हुए उन पर हमला करने की कोशिश की और धमकी दी, 'तू सिखाएगा मुझे अब... तेरी रिक्वेस्ट रिजेक्ट है... चल निकल यहां से... निकलता है कि नहीं तू।
पत्र में वकील ने अपनी शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया कि ट्रैफिक एसपी ने सीबीआई जैसी संस्था का भी अपमान किया। उन्होंने कहा कि वे कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे थे, बल्कि आधे घंटे से जाम में फंसे होने के कारण मदद मांग रहे थे। अगर एसपी ने सामान्य तरीके से मना कर दिया होता तो वे बिना किसी आपत्ति के वहां से चले जाते।
सीबीआई प्रासिक्यूटर ने डीजीपी से ट्रैफिक एसपी के आचरण की जांच कराने, उनके स्वभाव और संवेदनशील कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी के लिए उपयुक्तता का आकलन करने और पुलिस मैनुअल के नियमों का पालन कराने के निर्देश देने की मांग की है।
पत्र के जरिये वकील ने कहा कि यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत अभद्रता का नहीं, बल्कि एक सरकारी अधिकारी के आचरण और संस्थागत गरिमा का सवाल है। उन्होंने कहा कि अगर एक आइपीएस अधिकारी सरकारी अधिकारी के साथ ऐसा व्यवहार कर सकता है, तो आम नागरिकों के साथ उनका व्यवहार कैसा होगा, यह एक गंभीर चिंता का विषय है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

