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कार्बन मार्केट से बदलेगी झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था : पीसीसीएफ

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कार्बन मार्केट से बदलेगी झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था : पीसीसीएफ


रांची, 30 अक्टूबर (हि.स.)।

वन विभाग की ओर से शुक्रवार को होटल चाणक्य बीएनआर, रांची में लिवरेजिंग कार्बन मार्केट फॉर ए क्लाईमेट रेजिलेंट झारखंड विषय पर हितधारक कार्यशाला आयोजित किया गया।

इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) और वन बल प्रमुख संजीव कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों की आजीविका मजबूत करने की बात पर कार्बन मार्केट की संभावनाओं पर ठोस पहल की शुरूआत की है। कार्बन मार्केट से झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था बदलेगी।

इसके साथ ही यहां के किसानों और जनजातीय समुदायों की आजीविका मजबूत होगी। कार्बन ट्रेडिंग पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय आजीविका संवर्धन का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। उन्होंने इसरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए झारखंड में लगभग 69 प्रतिशत भूमि क्षरण की चुनौती का उल्लेख किया। उन्होंने जल संरक्षण, पौधारोपण, भूमि पुनर्स्थापन और बायोगैस को बढ़ावा देने पर जोर दिया। पीपीसीएफ और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक रवि रंजन ने वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर कार्बन परियोजनाएं विकसित करने एवं सामुदायिक आजीविका को प्राथमिकता देने की बात कही।

नाबार्ड के डीजीएम राकेश सिन्हा ने किसानों और ग्रामीण समुदायों तक कार्बन वित्त पहुंचाने में वित्तीय संस्थानों की भूमिका बताई। कार्यशाला में कृषि वानिकी, भूमि पुनर्स्थापन, सीएसआर और कार्बन वित्त के जरिए ग्रामीण विकास पर चर्चा हुई। इस दौरान झारखंड की जलवायु जोखिम मानचित्रण रिपोर्ट जारी की गई और डिजिटल मापन एवं सत्यापन तकनीक का प्रदर्शन किया गया।

कार्यक्रम में अनुराधा मिश्रा, डॉ एचएस गुप्ता, एटी मिश्रा, क्लाइमटेक्स के निदेशक विजय सहित नाबार्ड, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, जीआईजेड, जेएसएलपीएस और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar