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वन सीमा से क्रशर इकाईयों की दूरी को लेकर व्यवसायियों ने की चेंबर से हस्तक्षेप की मांग

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वन सीमा से क्रशर इकाईयों की दूरी को लेकर व्यवसायियों ने की चेंबर से हस्तक्षेप की मांग


रांची, 02 मई (हि.स.)। झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स के माइनर मिनरलस उप समिति की बैठक शनिवार को चेंबर भवन में हुई।

बैठक में राज्य के खनन पट्टाधारियों और क्रशर व्यवसायी उपस्थित थे। बैठक में झारखंड उच्च न्यायालय में दायर पीआईएल (आनंद कुमार बनाम झारखंड सरकार) पर खनन पट्टों की वन सीमा से दूरी 400 मीटर और क्रशर इकाइयों की दूरी 500 मीटर निर्धारित किए जाने के प्रभाव पर चर्चा की गई। यह कहा गया कि इस निर्णय से राज्य के अधिकांश क्रशर और खनन पट्टों के कंसेंट टू ऑपरेट पर रोक लग गई है, जिससे पूरा उद्योग गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

माइनर मिनरलस उप समिति के अध्यक्ष नितेश सारदा ने बताया कि वर्ष 2015 से पूर्व वन सीमा से दूरी 500 मीटर निर्धारित थी, जिसे सरकार की ओर से घटाकर 250 मीटर कर दिया गया था। वर्तमान में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पुनः पूर्व की व्यवस्था प्रभावी हो गई है। राज्य के सभी व्यवसायियों ने उस समय प्रचलित नियमों के अनुरूप अपने-अपने लाइसेंस प्राप्त किए थे और उसी के आधार पर पर्यावरण स्वीकृति, स्थापना की अनुमति एवं संचालन की स्वीकृति प्राप्त कर खनन एवं क्रशर इकाइयों में निवेश किया।

बंद हो सकते हैं लगभग 60 से 70 प्रतिशत पत्थर खदानें

क्रशर व्यवसायियों ने यह भी कहा कि यदि वर्तमान स्थिति बनी रहती है तो राज्य के लगभग 60 से 70 प्रतिशत तक पत्थर खदानें और क्रशर इकाइयां तत्काल प्रभावित होकर बंद हो सकती हैं, जिससे पत्थर (गिट्टी) की आपूर्ति बाधित होगी और राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। परिणामस्वरूप आम जनता को भी बालू की तरह गिट्टी ऊंचे दामों पर उपलब्ध हो सकती है। यह भी कहा गया कि अन्य पडोसी राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में खनन एवं क्रशर इकाइयों के लिए दूरी के मानक अपेक्षाकृत कम (आमतौर पर लगभग 200 मीटर, जो क्षेत्र एवं श्रेणी के अनुसार भिन्न हो सकते हैं) रखे गए हैं। साथ ही भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से 29 जनवरी 2025 और 30 जनवरी 2025 को प्रकाशित गजट में भी वन सीमा से दूरी लगभग 250 मीटर निर्धारित की गई है। इस तुलना से स्पष्ट है कि झारखंड में नियम अधिक कठोर है।

सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर करने की जरूरत

खनन पट्टाधारियों और क्रशर व्यवसाय संघ के उपाध्यक्ष अनिल सिंह ने सरकार से अविलंब नियमों में आवश्यक संशोधन कराने के लिए झारखंड चेंबर से हस्तक्षेप की मांग की, ताकि इस उद्योग को बंद होने से बचाया जा सके। खनन पट्टाधारियों और क्रशर व्यवसाय संघ के सचिव पंकज सिंह ने वन सीमा से दूरी, आरसीडी से संबंधित मामलों, राज्य सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर करने की जरूरत, खनन रॉयल्टी और अन्य विभिन्न मुद्दों की जानकारी दी।

वहीं चेंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही मंत्री और विभागीय उच्चाधिकारियों से मिलकर वार्ता के लिए आश्वस्त किया।

बैठक में झारखंड चेंबर के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया, राम बांगड़, महासचिव रोहित अग्रवाल, सह सचिव रोहित पोद्दार, उप समिति चेयरमैन नितेश सारदा, डॉ अनल कुमार सिन्हा, सदस्य मोइज़ अख्तर (भोलू), संदीप कुमार और राज्य के विभिन्न जिलों से आए अनेक प्रमुख व्यवसायी उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak