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जल-जंगल-जमीन पर पहला अधिकार उस समुदाय का, जिसने पीढ़ियों से बचाया : सुदेश

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जल-जंगल-जमीन पर पहला अधिकार उस समुदाय का, जिसने पीढ़ियों से बचाया : सुदेश


रांची, 30 सितंबर (हि.स.)। आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो ने कहा कि वन अधिकार केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन पर समुदाय के अधिकार, सम्मान और अस्तित्व से जुड़ा सवाल है। वन अधिकार कानून का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब स्थानीय समुदायों को उनके अधिकारों के साथ वन संरक्षण और प्रबंधन की निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी मिले।

सुदेश महतो बुधवार को अनगड़ा के सीताफॉल पार्किंग स्थल में सामुदायिक वन पालन संस्थान (आईसीएफजी) के तत्वावधान में आयोजित वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन और सामुदायिक वन पालन विषयक प्रखंड स्तरीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

सुदेश ने कहा कि झारखंड के जंगल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि यहां के लोगों की जीवन-व्यवस्था, संस्कृति, परंपरा और आजीविका का आधार हैं।

उन्होंने कहा कि जिस समुदाय ने पीढ़ियों तक जंगलों को बचाया है, उसे जंगलों से अलग रखकर संरक्षण की स्थायी व्यवस्था नहीं बनाई जा सकती। वन संरक्षण की नीतियों में स्थानीय अनुभव, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक भागीदारी को केंद्र में रखना होगा।

सुदेश महतो ने कहा कि वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन को महज कागजी प्रक्रिया और सरकारी औपचारिकता नहीं बनाया जाना चाहिए। अधिकारों की पहचान, उनका वास्तविक हस्तांतरण और ग्राम स्तर पर निर्णय प्रक्रिया में समुदाय की भागीदारी—इन तीनों पर समान रूप से काम करने की जरूरत है।

वहीं कार्यक्रम के शुभारंभ से पूर्व झारखंड की लोकसंस्कृति, कला, परंपरा और आदिवासी जीवन-दर्शन को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाले पद्मश्री डॉ रामदयाल मुंडा की पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।

सम्मेलन में झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन के डॉ संजय बसु मलिक, पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस सहित कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, महिला समूहों के प्रतिनिधि, वन अधिकार कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak