खनिज संपदा और राज्य के राजस्व से जुड़े सवालों पर भाजपा ठोस जवाब दे : विनोद पांडेय
रांची, 14 अगस्त (हि.स.)। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केन्द्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने खनिज संशोधन विधेयक बिल को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि झामुमो जल-जंगल-जमीन और राज्य के अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। केंद्र के प्रस्ताव से राज्यों के अधिकार सीमित होने की आशंका पर पार्टी लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आवाज उठाएगी। झारखंड के संवैधानिक अधिकार, खनिज संपदा और राज्य के राजस्व से जुड़े सवालों का भाजपा ठोस जवाब दे।
उन्होंने शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, डीएमएफ और जीएसटी को जेएमबीएल सेस का विकल्प बताकर मूल सवाल से नहीं बचा जा सकता। उन्होंने भाजपा से पूछा कि झारखंड की खनिज संपदा पर अंतिम नियंत्रण झारखंड की जनता और निर्वाचित सरकार का होगा या दिल्ली का। पांडेय ने कहा कि केंद्र सरकार यदि राज्यों के अधिकार प्रभावित नहीं करना चाहती तो खनिजयुक्त भूमि पर कर, सेस और लेवी लगाने के लिए राज्यों पर नई शर्तें लगाने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
विनोद पांडेय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ खनिजयुक्त भूमि पर राज्यों के कराधिकार को मान्यता दे चुकी है। इसी संवैधानिक अधिकार के आधार पर झारखंड विधानसभा ने जेएमबीएल सेस कानून बनाया है। ऐसे में संसद के कानून के जरिए राज्यों के अधिकारों को व्यवहार में सीमित करने का प्रयास संघीय भावना के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि खनन का सामाजिक और पर्यावरणीय बोझ झारखंड उठाता है। विस्थापन, जंगल और पर्यावरण पर दबाव, पानी और हवा पर असर तथा स्थानीय आधारभूत संरचना पर बढ़ते बोझ को देखते हुए खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए राज्य को अतिरिक्त संसाधन जुटाने का अधिकार होना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar

