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बांस आधारित उद्योगों से झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा : दीपिका

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बांस आधारित उद्योगों से झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा : दीपिका


रांची, 10 जुलाई (हि.स.)। झारखंड की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि बांस आधारित उद्योग झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन को नई दिशा दे सकते हैं। इससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, महिलाओं को व्यापारिक गतिविधि से जुड़कर आर्थिक स्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा।

मंत्री शुक्रवार को बतौर मुख्य अतिथि रांची स्थित जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विस (एक्सआईएसएस) में आयोजित बंबू इकोसिस्टम कॉन्क्लेव-2026 में आयोजित नीति संवाद को संबोधित कर रही थीं। मंत्री ने कहा कि हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन में उद्योग, पर्यटन और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में झारखंड के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की जल, जंगल और जमीन सबसे बड़ी पूंजी हैं, जिनका संरक्षण करते हुए रोजगार, निवेश और सतत विकास के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

उन्होंने बिरसा हरित ग्राम योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी योजना के तहत उत्पादित झारखंड के आम इस वर्ष दुबई, इटली और लंदन जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचे हैं। यह किसानों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की मेहनत का परिणाम है। इसी तरह बांस आधारित आजीविका भी ग्रामीण विकास का मजबूत माध्यम बन सकती है।

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि यदि नीति, तकनीक, वित्तीय सहयोग, डिजाइन, प्रसंस्करण और बाजार का बेहतर समन्वय हो तो झारखंड देश का अग्रणी बांस उत्पादक एवं बांस उद्योग केंद्र बन सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार बांस आधारित नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मिशन मोड में कार्य करेगी।

सम्मेलन का आयोजन नीड्स द्वारा यूरोपीय संघ समर्थित स्वशक्त परियोजना के तहत किया गया। इसमें सरकार, उद्योग, विशेषज्ञों और विकास साझेदारों ने बांस आधारित उद्योग, निवेश, मूल्य संवर्धन और ग्रामीण उद्यमिता पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं, शिक्षक सहित अन्य लोग मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar