home page

जेएसडीएमएस में फर्जी बैंक गारंटी और 55 करोड़ रुपये के भुगतान की हो न्यायिक जांच : बाबूलाल मरांडी

 | 
जेएसडीएमएस में फर्जी बैंक गारंटी और 55 करोड़ रुपये के भुगतान की हो न्यायिक जांच : बाबूलाल मरांडी


रांची, 17 जुलाई (हि.स.)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (जेएसडीएमएस) में कथित फर्जी बैंक गारंटी, ब्लैकलिस्ट की गई कंपनियों को भुगतान और करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पूरे मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने, विशेष ऑडिट कराने तथा दोषी अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

मरांडी ने कहा कि जेएसडीएमएस से जुड़े जो दस्तावेज और तथ्य सार्वजनिक हुए हैं, वे राज्य में वित्तीय अनुशासन, प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार की प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उनका आरोप है कि उपलब्ध अभिलेखों से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि फर्जी बैंक गारंटी प्रस्तुत करने के आरोप में ब्लैकलिस्ट की गई कंपनियों को बाद में नियमों की अनदेखी करते हुए ब्लैकलिस्ट से बाहर कर दिया गया और उन्हें करोड़ों रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। इसके बाद उन्हीं कंपनियों को दोबारा ब्लैकलिस्ट किए जाने से पूरे मामले पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, उपलब्ध दस्तावेजों में उल्लेख है कि तत्कालीन मिशन निदेशक ने 8 अगस्त 2024 को छह कंपनियों को फर्जी बैंक गारंटी प्रस्तुत करने का दोषी मानते हुए 7 अगस्त 2026 तक के लिए ब्लैकलिस्ट किया था। उनका दावा है कि इसके बावजूद 14 अक्टूबर 2024 को वर्तमान मिशन निदेशक शैलेंद्र लाल ने कथित तौर पर लोकहित का हवाला देते हुए इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट से मुक्त कर दिया और भुगतान का आदेश जारी किया। मरांडी के अनुसार, इसके बाद इन कंपनियों को लगभग 55 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

उन्होंने कहा कि अगस्त 2025 में फर्जी बैंक गारंटी मामले में तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे की गिरफ्तारी के बाद इन्हीं कंपनियों को दोबारा ब्लैकलिस्ट किया गया। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम पूरे मामले की निष्पक्ष और न्यायिक जांच की आवश्यकता को और अधिक मजबूत करता है।

मरांडी ने सरकार से कई सवाल भी पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि यदि संबंधित कंपनियां फर्जी बैंक गारंटी देने की दोषी थीं, तो उन्हें ब्लैकलिस्ट से बाहर किसके आदेश पर और किस नियम के तहत निकाला गया। उन्होंने यह भी पूछा कि लगभग 55 करोड़ रुपये के भुगतान की स्वीकृति किस अधिकारी और किस स्तर पर दी गई। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि फर्जी बैंक गारंटी मामले में एक विभाग के सचिव के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई हो सकती है, तो श्रम विभाग के तत्कालीन और वर्तमान सचिवों के विरुद्ध अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि क्या पूरे प्रकरण में किसी प्रभावशाली राजनीतिक अथवा प्रशासनिक संरक्षण के कारण नियमों की अनदेखी की गई।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और संभावित आपराधिक षड्यंत्र का प्रतीत होता है। इसलिए इसकी निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाना तथा दोषियों को कानून के दायरे में लाना आवश्यक है।

मरांडी ने मांग की कि फर्जी बैंक गारंटी, ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को भुगतान और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में श्रम विभाग के तत्कालीन सचिव, वर्तमान सचिव, संबंधित अधिकारियों तथा अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने वर्ष 2023-24 से अब तक जेएसडीएमएस के सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों का विशेष ऑडिट भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की भी मांग की।

उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक इस पूरे प्रकरण से जुड़े अधिकारियों को उनके वर्तमान दायित्वों से अलग किया जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता प्रभावित न हो। साथ ही ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को किए गए लगभग 55 करोड़ रुपये के भुगतान की वैधानिकता की जांच कर दोषी पाए जाने पर राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए।

मरांडी ने शैलेंद्र लाल, राजन श्रीवास्तव और विश्वरूप ठाकुर की भूमिका तथा उनकी संपत्तियों की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से विशेष जांच कराने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी राजनीतिक संरक्षण अथवा उच्च स्तर की संलिप्तता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य की जनता यह जानना चाहती है कि फर्जी बैंक गारंटी के आरोपों का सामना कर रही कंपनियों को करोड़ों रुपये का भुगतान किन परिस्थितियों में किया गया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार के दावों की वास्तविक परीक्षा इस मामले में पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई से ही होगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे