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(लीड )विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च जनमंच : रबींद्र नाथ महतो

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(लीड )विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च जनमंच : रबींद्र नाथ महतो


रांची, 06 अगस्त (हि.स.)। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन गुरुवार को सदन में दिवंगत प्रमुख हस्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही सभा की कार्यवाही शुक्रवार को 11 बजे दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।

सदन ने पिछले सत्र के बाद दिवंगत हुए पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों, विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों, शहीद जवानों और अलग-अलग हादसों में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।

सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने अपने प्रारंभिक भाषण में कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च जनमंच है। संविधान ने विधानमंडलों को तीन मूलभूत दायित्व सौंपे हैं, विधेयकों पर विचार कर कानून बनाना, राज्य की वित्तीय व्यवस्था एवं बजट की समीक्षा और अनुमोदन करना तथा कार्यपालिका को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाए रखना। इन दायित्वों का प्रभावी निर्वहन ही लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की सफलता का आधार है। इन्हीं संवैधानिक दायित्वों को ध्यान में रखते हुए इस मानसून सत्र की कार्यसूची निर्धारित की गई है।

महतो ने कहा कि इस सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 का प्रथम अनुपूरक बजट सदन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही, पांच कार्य दिवस प्रश्नकाल के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिससे माननीय सदस्यों को जनहित के प्रश्नों के माध्यम से सरकार को उत्तरदायी बनाने का पर्याप्त अवसर प्राप्त होगा। प्रश्नकाल संसदीय लोकतंत्र का एक प्रभावी माध्यम है, जो शासन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और जनविश्वास को सुदृढ़ करता है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि 12 अगस्त को संसदीय परंपरा के अनुरूप गैर सरकारी सदस्य का कार्य निर्धारित है। यह सदस्यों को जनहित के विषयों पर अपने विचार, सुझाव और पहल सदन के समक्ष रखने का महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। मुझे विश्वास है कि इस अवसर का उपयोग सदन की गरिमा एवं संसदीय परंपराओं के अनुरूप किया जाएगा।

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि हाल ही में राज्य विधानसभाओं के कार्यनिष्पादन पर पीआरएस द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार वर्ष 2025 में देश के 28 राज्यों तथा 3 केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं की औसत बैठक अवधि 24 दिन रही। लेकिन यह संतोष का विषय है कि झारखंड विधानसभा गत वर्ष 30 दिनों तक संचालित हुई, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। यह उपलब्धि सदन के सभी सदस्यों की सक्रिय सहभागिता और संसदीय प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि इस मानसून सत्र की सभी बैठकों का संचालन पूरी गंभीरता, अनुशासन और रचनात्मकता के साथ करें, तो इस वर्ष भी हम सभी इस उत्कृष्ट परंपरा को बनाए रखेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज विश्व तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक चुनौतियां और विकास की नई आवश्यकताएं शासन-व्यवस्था के समक्ष नए अवसर और नई जिम्मेदारियां लेकर आई हैं। ऐसे समय में हमारी यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि झारखंड के विकास, सामाजिक समरसता, कृषि, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा जनकल्याण से जुड़े विषयों पर गंभीर और सार्थक विचार-विमर्श हो। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान हमें अधिकारों के साथ उत्तरदायित्व भी सौंपता है। लोकतंत्र केवल बहुमत का शासन नहीं, बल्कि संवाद, सहिष्णुता और विचारों के सम्मान की संस्कृति है। सत्ता पक्ष और विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था के समान रूप से महत्त्वपूर्ण अंग हैं। मतभेद स्वाभाविक हैं, परंतु जनहित सदैव सर्वोपरि रहना चाहिए। स्वस्थ संवाद, तथ्यपूर्ण बहस और सकारात्मक सहयोग ही लोकतांत्रिक संस्थाओं की वास्तविक शक्ति हैं।

विधानसभा अध्यक्ष की ओर से मानसून सत्र के लिए कार्यमंत्रणा समिति और पीठासीन पदाधिकारियों का मनोनयन भी किया गया। इस दौरान संसदीय कार्यमंत्री की ओर से पिछले सत्र के दौरान सदन में सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों पर कृत कार्रवाई प्रतिवेदन भी सदन के पटल पर रखा गया।

बाद में सदन में पूर्व परिवहन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री और गोमिया के पूर्व विधायक माधव लाल सिंह, पूर्व पशुपालन मंत्री एवं धनबाद के पूर्व विधायक मन्नान मलिक, पूर्व विधायक बेनी प्रसाद गुप्ता और हरि राम, पूर्व खनन मंत्री लक्ष्मण राम तथा पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय को श्रद्धांजलि दी गई। इसके अलावा डॉ डीवाई पाटिल, पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी, गायिका आशा भोसले, शायर बशीर बद्र, संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, वरिष्ठ पत्रकार एचके दुआ, लोक कलाकार तीजन बाई, निशानेबाज जसपाल राणा, क्रिकेटर गोपीनाथ, खोरठा साहित्यकार सुरेश विश्वकर्मा तथा झारखंड आंदोलनकारी कृष्ण कुमार महतो और दामू बांड्रा को भी याद किया गया। सदन ने जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में शहीद हुए जवानों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके साथ ही उधमपुर सड़क हादसे, लखनऊ की आग की घटना, असम बाढ़ और नीट परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्र-छात्राओं को भी याद किया गया।

कार्यवाही के दौरान असम के बाढ़ पीड़ितों के लिए झारखंड सरकार की ओर से तीन करोड़ रुपये की सहायता दिए जाने का भी उल्लेख किया गया। शोक प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मांडू के विधायक निर्मल कुमार ने अपने क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं, हाथियों के हमलों, वज्रपात और खदान धंसने की घटनाओं में हुई मौतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से इन घटनाओं के पीड़ित परिवारों को भी आर्थिक सहायता देने की मांग की।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे