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भ्रूण हत्या और जन्म पूर्व लिंग परीक्षण करनेवाने अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर होगी कार्रवाई : उपायुक्त

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भ्रूण हत्या और जन्म पूर्व लिंग परीक्षण करनेवाने अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर होगी कार्रवाई : उपायुक्त


देवघर, 02 सितंबर (हि.स.)। उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में बुधवार को पीसी-पीएनडीटी एक्ट-1994 से संबंधित जिला सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन उपायुक्त कार्यालय में किया गया।

इस दौरान उपायुक्त ने बैठक के माध्यम से आए हुए विभिन्न केंद्रों के आवेदनों पर विचार-विमर्श करते हुए समिति की ओर से सभी मामलों की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई करने पर सहमति जताई।

बैठक में उपायुक्त ने बताया कि वर्तमान में देवघर जिला में कुल 55 अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं। सभी निबंधित अल्ट्रासाउंड केंद्रों में जिला स्तर पर गठित टीम की ओर से औचक निरीक्षण कर जांच किया जा रहा है कि इस संस्थानों में भ्रूण हत्या, जन्म पूर्व लिंग परीक्षण और अन्य किसी भी माधयम से बेटियों की हत्या का कार्य नहीं किया जा रहा है। यदि उपरोक्त मामलों में कोई भी संस्थान संलिप्त पाए जाते हैं तो उक्त संस्थान के लाइसेंस को रद्द करते हुए जिला स्तर से विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 भारत में कन्या भुण्र हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए भारत की संसद की ओर से पारित एक संघीय कानून है। इस अधिनियम से प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक पीसी-पीएनडीटी एक्ट- 1994 के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाले जोड़े या करने वाले डाक्टर, लैब कर्मी को तीन से पांच साल सजा और 10 से 50 हजार जुर्माने की सजा का प्रावधान है।

बैठक में उपरोक्त के अलावा उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा, सिविल सर्जन, संबंधित विभाग के अधिकारी, चिकित्सकों की टीम, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Anup Kumar Roy