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भगवान जगन्नाथ का 108 कलशों से महास्नान, 56 भोग के बाद 15 दिनों के अनवसर में विराजे महाप्रभु

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भगवान जगन्नाथ का 108 कलशों से महास्नान, 56 भोग के बाद 15 दिनों के अनवसर में विराजे महाप्रभु


भगवान जगन्नाथ का 108 कलशों से महास्नान, 56 भोग के बाद 15 दिनों के अनवसर में विराजे महाप्रभु




जमशेदपुर,29 जून (हि.स.)। लौहनगरी जमशेदपुर सोमवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के रंग में रंग गई। ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर इस्कॉन जमशेदपुर की ओर से धालभूम क्लब में आयोजित भव्य देव स्नान महोत्सव में भगवान जगन्नाथ,उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का वैदिक मंत्रोच्चार एवं हरिनाम संकीर्तन के बीच 108 पवित्र कलशों से महास्नान कराया गया। शंखध्वनि,मृदंग की थाप और हरे रामा-हरे कृष्णा महामंत्र के गूंजते स्वर के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने इस दिव्य आयोजन का साक्षी बनकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।

जगन्नाथ संस्कृति में ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इसी दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का सार्वजनिक स्नान कराया जाता है, जिसके साथ ही विश्वविख्यात रथयात्रा महापर्व की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। इस्कॉन जमशेदपुर द्वारा आयोजित इस महोत्सव में भी पारंपरिक वैदिक विधि-विधान के अनुसार सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए।

महास्नान के लिए 108 कलशों में केवल जल ही नहीं,बल्कि आयुर्वेदिक और प्राकृतिक तत्वों का विशेष मिश्रण तैयार किया गया था। अभिषेक में पवित्र गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर), चंदन एवं अश्वगंधा का सुगंधित लेप, डाब (नारियल) का जल तथा विभिन्न ताजे फलों के रस का उपयोग किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह स्नान भगवान को शीतलता प्रदान करने के साथ दिव्यता और औषधीय गुणों का भी प्रतीक माना जाता है। जैसे ही भगवान का अभिषेक आरंभ हुआ, पूरा परिसर हरिनाम संकीर्तन और जयघोष से गूंज उठा।

महास्नान के उपरांत भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को श्रद्धापूर्वक 56 प्रकार के पारंपरिक व्यंजनों का महाभोग अर्पित किया गया। इसके बाद सदियों पुरानी जगन्नाथ परंपरा का पालन करते हुए भगवान को 15 दिनों के लिए अनवसर (एकांतवास) में विराजमान कराया गया।

धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा पर हुए विशेष स्नान के कारण भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और इस अवधि में विश्राम करते हैं। इसलिए आगामी 15 दिनों तक मंदिर के पट सामान्य दर्शन के लिए बंद रहेंगे तथा इस दौरान भगवान को औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष काढ़ा अर्पित किया जाएगा।

अनवसर अवधि पूरी होने के बाद नेत्रोत्सव के अवसर पर भगवान जगन्नाथ नवयौवन स्वरूप में पुनः भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकलने वाली भव्य रथयात्रा में भगवान अपने भक्तों के बीच नगर भ्रमण के लिए रथ पर विराजमान होंगे।

इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में इस्कॉन जमशेदपुर के प्रमुख पद्मनाभ जगन्नाथ दास के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम में भवानी शंकर गुप्ता, सन्नी संघी, शेखर पर्वत, सुमित अग्रवाल, राजेश भगत, नीरज तिवारी, तन्नू, यश दुर्गे, पवन अग्रवाल, महावीर शर्मा सहित बड़ी संख्या में कृष्ण भक्त उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान भक्तों ने हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन और आरती में भाग लेकर भगवान जगन्नाथ से सुख, समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक