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गुणवत्तायुक्त बीज से 75 प्रतिशत तक बढ़ सकता है उत्पादन : डॉ. पूनम जसरोटिया

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गुणवत्तायुक्त बीज से 75 प्रतिशत तक बढ़ सकता है उत्पादन : डॉ. पूनम जसरोटिया


रांची, 29 जुलाई (हि.स.)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की सहायक महानिदेशक (पौधा संरक्षण एवं जैव सुरक्षा) डॉ. पूनम जसरोटिया ने कहा कि आधुनिक कृषि प्रबंधन तकनीकों के साथ गुणवत्तायुक्त बीजों का उपयोग करने पर फसलों के उत्पादन में 75 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने में उन्नत बीजों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और भविष्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसानों तक गुणवत्तायुक्त बीजों की समय पर उपलब्धता जरूरी है।

बुधवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में आयोजित 23वीं बीज परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. जसरोटिया ने बताया कि वर्ष 2025-26 में देश में 376 मिलियन टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ, जिसमें गुणवत्तायुक्त बीजों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि वर्ष 1969 से अब तक विभिन्न फसलों की 3276 उन्नत किस्में विकसित और अधिसूचित की जा चुकी हैं। इनमें 187 बायोफोर्टीफाइड तथा 587 जलवायु अनुकूल (क्लाइमेट रेजिलिएंट) किस्में शामिल हैं, जो बदलती जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं।

डॉ. पूनम जसरोटिया ने बताया कि नए बीज विधेयक पर संसद में चर्चा चल रही है। इसके कानून बनने के बाद बीज उत्पादन, भंडारण, परिवहन, विपणन, वितरण और गुणवत्ता नियंत्रण से संबंधित नए प्रावधान लागू होंगे। इससे बीज क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को प्रमाणित एवं गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था और मजबूत होगी।

डॉ. जसरोटिया ने कहा कि आईसीएआर नई बीज किस्मों के विकास में लगने वाले समय को कम करने तथा बीज गुणन की प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है, ताकि नई तकनीकों और उन्नत किस्मों का लाभ कम समय में किसानों तक पहुंच सके।

इस अवसर पर बीएयू के कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे ने कहा कि किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए उनकी आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तायुक्त बीज समय पर उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी केवल नई किस्मों का विकास करना ही नहीं, बल्कि किसानों को उनके गुणों, गुणवत्ता और उपयोगिता के प्रति जागरूक एवं आश्वस्त करना भी है। उन्होंने राज्य बीज नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी बल दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों का स्वागत करते हुए बीएयू के निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) डॉ. शम्भूनाथ कर्माकर ने कहा कि बीज कृषि की आत्मा है। आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में भी गुणवत्तायुक्त बीज का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने वर्ष 2025-26 में विभिन्न फसलों के 5700 क्विंटल प्रजनक, प्रमाणित एवं सत्यापित बीजों का उत्पादन किया। वर्ष 2026-27 के लिए 5265 क्विंटल बीज उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

समेति, झारखंड के निदेशक विकास कुमार ने कहा कि राज्य के प्रत्येक जिले में एक आदर्श ग्राम विकसित किया जाएगा, जिसे राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की विकास योजनाओं से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि सेवा में कार्य करना सौभाग्य की बात है, क्योंकि इसके माध्यम से गरीब किसानों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम के दौरान नवोन्मेषी कृषि पद्धतियों को अपनाने वाले राज्य के चार प्रगतिशील किसानों मेही लाल गोप (गोमिया, बोकारो), राजेश प्रसाद चौधरी (धनबाद), चंदन चौधरी (रांची) और विपिन कुमार को सम्मानित किया गया।

बैठक में आईसीएआर शोध संस्थान, पलाण्डु के प्रधान डॉ. अवनी कुमार सिंह, केंद्रीय वर्षाश्रित उपराऊं भूमि चावल अनुसंधान संस्थान, हजारीबाग के प्रधान डॉ. एम.पी. मंडल, बीएयू के पूर्व डीन डॉ. राघव ठाकुर एवं डॉ. एस.के. पाल, अनुसंधान निदेशक डॉ. पी.के. सिंह, डीन डॉ. डी.के. शाही, डॉ. रमेश कुमार, डॉ. आलोक कुमार पांडेय, डॉ. कौशल कुमार, कुलसचिव डॉ. शैलेश चट्टोपाध्याय सहित विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak