ईरान-पाकिस्तान के संबंध मौजूदा मुश्किलों से पार पा लेंगे: हसन नौरियन
इस्लामाबाद (पाकिस्तान), 25 अक्टूबर (हि.स.)। देश की आर्थिक राजधानी कराची में ईरान के महावाणिज्य दूत के पद पर रहे हसन नौरियन ने ईरान और पाकिस्तान के बीच बातचीत, सहयोग और आपसी समझ की वकालत की है। उन्होंने कहा कि दोनों देश साझा मूल्यों, मजबूत ऐतिहासिक संबंधों और एक-दूसरे से जुड़ी आजीविका के जरिए आपस में जुड़े हुए हैं। महावाणिज्य दूत नौरियन ने कहा कि दोनों देशों के लोगों की धार्मिक मान्यताएं, सामाजिक मूल्य और संस्कृति एक जैसी हैं और उनके ऐतिहासिक संबंध तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क आज भी मजबूत हैं।
द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि ईरान इस समय सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। जब दोनों में से किसी एक पर कोई मुश्किल आती है, तो दूसरा देश भी उससे प्रभावित होता है। नौरियन ने कहा, हमारी अर्थव्यवस्था, समाज और आजीविका एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के लोग महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत, सहयोग और आपसी समझ बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, रात चाहे कितनी भी घनी क्यों न हो, सवेरा जरूर होता है। उन्होंने भरोसा जताया कि मुश्किल हालात के बावजूद दोनों देशों का भविष्य उज्ज्वल है। नौरियन ने पाकिस्तानी लोगों को उनकी हमदर्दी, एकजुटता और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ये मुश्किल दिन गुजर जाएंगे और इस क्षेत्र पर छाए काले बादल जल्द ही छंट जाएंगे।
मक्का और मदीना पर हमले की निंदा
इस बीच, पाकिस्तान उलेमा काउंसिल के चेयरमैन हाफिज ताहिर महमूद अशरफी ने मक्का और मदीना को निशाना बनाकर किए गए हूती के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। लाहौर से जारी एक वीडियो बयान में अशरफी ने कहा कि मक्का और मदीना मुसलमानों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि इनकी सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस खतरे से निपटने के लिए ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल आपातकालीन बैठकें बुलाने की मांग की।
अशरफी ने कहा कि हूती लड़ाकों और उनका समर्थन करने वालों के इरादे खतरनाक हैं। उन्होंने जोर दिया कि मुस्लिम दुनिया के नेताओं को इस मामले पर एक स्पष्ट और संयुक्त फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'मक्का और मदीना' की रक्षा और हिफाजत के मामले में मुस्लिम उम्माह, सऊदी अरब के नेतृत्व और वहां की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

