अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की सहयोगियों को चेतावनी, 'ईरान समझौते को कमजोर न करें'
वाशिंगटन, 18 जून (हि.स.)। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ हुए समझौते की आलोचना करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा है कि इस समझौते को कमजोर करने के प्रयास मध्य पूर्व में स्थिरता स्थापित करने के एक महत्वपूर्ण अवसर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वेंस ने ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति का बचाव किया। उन्होंने कहा कि समझौते के बारे में कई आलोचनाएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और इसके प्रावधानों को लेकर कई गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं।
लेबनान में तनाव कम करने पर जोर
वेंस ने अपने वक्तव्य का बड़ा हिस्सा लेबनान की स्थिति पर केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में हिंसा कम करने और शांति कायम रखने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की अपेक्षा है कि हिज्बुल्लाह इजराइल पर रॉकेट और ड्रोन हमले नहीं करेगा।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इजराइल की भी जिम्मेदारियां हैं और उसे लेबनान में सैन्य कार्रवाई के दौरान संयम बरतना चाहिए। उनके अनुसार, संघर्षविराम पूर्ण नहीं होता, लेकिन क्षेत्र में हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है और कूटनीतिक प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं।
इजराइली नेताओं पर तीखी टिप्पणी
उपराष्ट्रपति वेंस ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन के उन नेताओं की आलोचना की, जिन्होंने ईरान समझौते पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजराइल के सबसे मजबूत समर्थकों में से एक हैं और ऐसे में सार्वजनिक आलोचना उचित नहीं है।
वेंस ने यह भी उल्लेख किया कि हालिया संघर्ष के दौरान इजराइल की सुरक्षा में इस्तेमाल हुए कई रक्षात्मक हथियार अमेरिका द्वारा उपलब्ध कराए गए थे और उनका वित्तपोषण अमेरिकी करदाताओं के संसाधनों से हुआ था।
रिपब्लिकन नेताओं से भरोसा रखने की अपील
ईरान समझौते को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की वार्ता क्षमता पर विश्वास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने बातचीत में मजबूत स्थिति बनाए रखी है और यदि ईरान समझौते का पालन नहीं करता है तो दबाव बढ़ाने के विकल्प भी मौजूद हैं।
क्षेत्रीय शांति का व्यापक लक्ष्य
वेंस ने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवहार करने के लिए प्रोत्साहित करना और क्षेत्र में सशस्त्र समूहों को मिलने वाले समर्थन को कम करना है। उनके अनुसार, यदि ईरान एक सामान्य राष्ट्र की तरह व्यवहार करता है तो इससे पूरे क्षेत्र को लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की दीर्घकालिक नीति मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष को रोकने, सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने पर केंद्रित है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय

