अमेरिका ने संरा महासभा खत्म होने के बाद न्यूयॉर्क में रुके ईरान के दो राजनयिकों को निकाला
वाशिंगटन, 04 अक्टूबर (हि.स.)। अमेरिका ने ईरान के दो राजनयिकों को देश से बाहर भेज दिया। दोनों संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासभा में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे और महासभा खत्म होने के बाद भी वहीं रुके रहे। अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन को निर्देश दिया था कि यूएन महासभा में शामिल होने आए उसके प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य अमेरिका छोड़ दें। एक्सिओस की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
एक्सिओस की रिपोर्ट के अनुसार, महासभा में शामिल होने आए उसके प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्य (राजनयिक) न्यूयॉर्क में ही रुके रहे। अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को इस बारे में ईरानी मिशन सूचित किया। इसके बाद ईरान को दोबारा संदेश भेजकर दोनों को तुरंत अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया। इसके बाद एक राजनयिक शुक्रवार रात और दूसरा शनिवार सुबह न्यूयॉर्क से रवाना हो गया।
यह दोनों देशों के बीच तनाव का ताजा संकेत है, क्योंकि युद्ध खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें विफल हो रही हैं और फिर से लड़ाई शुरू होने की आशंका बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा हर साल न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में होती है। इसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, राजनयिक और अधिकारी शामिल होते हैं। ईरान का प्रतिनिधिमंडल भी इसी बैठक के लिए न्यूयॉर्क आया था।
विदेशी प्रतिनिधियों को अमेरिका में रहने के लिए वीजा और राजनयिक नियमों का पालन करना होता है। उनका दर्जा और अमेरिकी सरकार की अनुमति यह तय करती है कि वे कितने समय तक वहां रह सकते हैं। महासभा खत्म होने के बाद भी अमेरिका में रुकने के लिए वैध अनुमति जरूरी है। बैठक में शामिल होने की अनुमति का मतलब यह नहीं कि प्रतिनिधि अपनी मर्जी से वहां रुक सकते हैं। नियमों के उल्लंघन पर अमेरिका उन्हें देश छोड़ने का आदेश दे सकता है।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी से शुरू हुई जंग में ईरान में करीब 7,300 लोग मारे गए और 32,314 घायल हुए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1.49 लाख इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, जिससे करीब चार लाख लोग प्रभावित हुए। करीब 32 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। इस युद्ध का असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ा। 229 स्वास्थ्य केंद्र और 49 अस्पताल क्षतिग्रस्त हुए। वहीं, ईरान ने अप्रैल में बताया था कि युद्ध की वजह से 24.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

