गुटेरेस ने नेपाल त्रासदी को जलवायु परिवर्तन के खतरे का वास्तविक रूप बताया
काठमांडू, 23 सितंबर (हि.स.)। संयुक्त राष्ट्रसंघ महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि तीन वर्ष पहले नेपाल के सगरमाथा (माउंट एवरेस्ट) क्षेत्र से उन्होंने जलवायु परिवर्तन के खतरे को लेकर जो चेतावनी दी थी, नेपाल में हाल की घटनाओं ने उसके वास्तविक रूप को सामने ला दिया है।
संयुक्त राष्ट्रसंघ की 81वीं महासभा को मंगलवार सुबह संबोधित करते हुए गुटेरेस ने कहा कि तीन वर्ष पहले उन्होंने नेपाल के हिमालय से दुनिया को चेतावनी दी थी कि ‘दुनिया की छत’ खतरे में है और बर्फ बेहद तेजी से पिघल रही है।
उन्होंने कहा, “तीन वर्ष पहले नेपाल के हिमालय से मैंने चेतावनी दी थी कि दुनिया की छत गिर रही है। मैंने बर्फ के बेहद तेजी से पिघलने को लेकर खतरे की घंटी बजाई थी। कुछ लोगों ने इसे खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना कहकर खारिज कर दिया था। लेकिन नेपाल की मौजूदा दुखद घटनाओं ने दिखा दिया है कि इसके गंभीर प्रभाव हमारी सोच से कहीं पहले सामने आ रहे हैं और उनका दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।”
गुटेरेस ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का खतरा अब वास्तविकता बन चुका है और दुनिया इसे अपनी आंखों के सामने देख रही है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी कीमत कमजोर देशों को चुकानी पड़ रही है, जबकि उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है।
उन्होंने महासभा में कहा कि जलवायु परिवर्तन की कीमत प्रदूषण फैलाने वालों को चुकानी होगी और इसके प्रभाव से प्रभावित कमजोर देशों को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने जलवायु न्याय की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि विकसित और समृद्ध देशों को इसकी कीमत चुकानी होगी।
गुटेरेस ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधन बेहद कम हैं। उन्होंने ‘हानि एवं क्षति कोष में मौजूद राशि को शर्मनाक रूप से कम बताया। उन्होंने कहा, “इसमें बेहद कम पैसा है। इसमें पर्याप्त धनराशि होनी चाहिए। अब और लूट एवं शोषण नहीं होना चाहिए।”
यूएन महासचिव ने विकसित देशों से जलवायु वित्त के संबंध में अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विकसित देशों को अनुकूलन वित्त को तीन गुना करना चाहिए और ‘हानि एवं क्षति कोष’ को बड़े स्तर पर प्रभावी ढंग से काम करने में सक्षम बनाना चाहिए।
गुटेरेस ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का खतरा सबसे अधिक कमजोर लोगों के लिए है। उन्होंने कहा कि आज एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी के भविष्य का इस्तेमाल कर रही है और एक समूह इससे लाभ कमा रहा है, जबकि जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कम जिम्मेदार लोग ही इसके सबसे पहले और सबसे गंभीर प्रभावों का सामना कर रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

