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क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पारित, समर्थन घटा

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संयुक्त राष्ट्र, 28 अक्टूबर (हि.स.)। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बुधवार को अमेरिका से क्यूबा पर छह दशक से अधिक समय से लागू आर्थिक प्रतिबंध हटाने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया। हालांकि, इस बार प्रस्ताव के समर्थन में पिछले वर्ष की तुलना में कम देशों ने मतदान किया। अमेरिकी कूटनीतिक प्रयासों के बीच कई देशों ने प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया या मतदान से दूरी बनाई।

मतदान में 130 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में, 17 ने विरोध में और 25 ने मतदान से परहेज किया। अमेरिका और इजराइल प्रस्ताव का विरोध करने वाले देशों में शामिल रहे। पिछले वर्ष प्रस्ताव के पक्ष में 165 देशों ने मतदान किया था, जबकि सात देशों ने विरोध और 12 ने मतदान से परहेज किया था। जर्मनी और इटली सहित कुछ पश्चिमी देशों ने भी इस बार मतदान से दूरी बनाई।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने मतदान के बाद कहा कि दक्षिण कोरिया और जर्मनी जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं सहित कई देशों का रुख बदलना अमेरिका के लिए संतोषजनक है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी प्रयासों से अपना रुख बदलने वाले देशों की संख्या तीन गुना हुई है और यह आगे भी बढ़ सकती है।

वहीं, क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने अमेरिकी दबाव की आलोचना करते हुए कहा कि वाशिंगटन क्यूबा के लोगों को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका का रवैया क्यूबा की जनता को सामूहिक दंड देने जैसा है।

अमेरिका ने 60 साल से अधिक समय से क्यूबा पर व्यापार प्रतिबंध लगा रखे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने हाल के महीनों में दबाव और बढ़ाया है। क्यूबा का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों ने उसके आर्थिक संकट को गंभीर बनाया है। देश में आवश्यक वस्तुओं की कमी, महंगाई और बुनियादी ढांचे की समस्याएं बनी हुई हैं। पिछले महीने बिजली ग्रिड ठप होने से लाखों लोग प्रभावित हुए थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय