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अफगानिस्तान में हिरासत में पत्रकारों की रिहाई की मांग, प्रेस स्वतंत्रता पर जताई चिंता

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काबुल, 03 मई (हि.स.)। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अफगानिस्तान में प्रेस की स्थिति को लेकर एक बार फिर चिंता जताई गई है। संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान में मानवाधिकार मामलों के विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने हिरासत में रखे गए पत्रकारों और मीडिया कर्मियों की तत्काल एवं बिना शर्त रिहाई की मांग की है।

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में पत्रकारों को स्वतंत्र और सुरक्षित माहौल में काम करने का अधिकार मिलना चाहिए। मौजूदा हालात में पत्रकारों को गिरफ्तारी, धमकी और उत्पीड़न के डर के बीच काम करना पड़ रहा है, जिससे स्वतंत्र पत्रकारिता प्रभावित हो रही है।

बयान में कहा गया कि अफगानिस्तान में मीडिया पर दबाव लगातार बढ़ा है और स्वतंत्र रिपोर्टिंग के लिए माहौल चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है। खासतौर पर शासन, मानवाधिकार और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को अधिक जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।

महिला पत्रकारों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें काम के दौरान अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें आवाजाही संबंधी प्रतिबंध, ड्रेस कोड और सीमित अवसर शामिल हैं। इन परिस्थितियों के कारण कई महिला पत्रकारों ने पेशा छोड़ दिया है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्टों में भी अफगानिस्तान में प्रेस स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में देश को निचले पायदानों में रखा गया है, जो मीडिया वातावरण की कठिनाइयों को दर्शाता है।

संयुक्त राष्ट्र ने जोर देकर कहा है कि पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता किसी भी समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि अफगानिस्तान में मीडिया को लेकर हालात में सुधार के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय