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रूस की सामूहिक सुरक्षा अवधारणा पर विचार करेंगे खाड़ी के देश

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रूस की सामूहिक सुरक्षा अवधारणा पर विचार करेंगे खाड़ी के देश


मॉस्को, 30 जून (हि.स./रिया नोवोस्ती)। रूस ने फारस की खाड़ी के लिए जिस अपडेटेड सामूहिक सुरक्षा अवधारणा को इस क्षेत्र के देशों के सामने पेश किया था, उसपर खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के मंत्री समूह की बैठक में चर्चा की जाएगी। जीसीसी फारस की खाड़ी से जुड़े छह अरब देशों- सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत, कतर, बहरीन और ओमान का राजनीतिक एवं आर्थिक मंच है, जिसका मुख्यालय रियाद में है।

रूस के उप विदेश मंत्री जॉर्जी बोरिसेन्को ने प्रमुख समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती को बताया कि जून की शुरुआत में रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल आक्रामकता के कारण क्षेत्र में पैदा हुए संकट के बीच फारस की खाड़ी के लिए रूस के सामूहिक सुरक्षा अवधारणा को अपडेट करते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया। इसे ईरान सहित क्षेत्र के कुछ अन्य देशों के सामने पेश किया गया।

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के अनुसार इस अवधारणा में एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामकता न करने की बात कही गई है और इसमें सैन्य क्षेत्र में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने के उपाय भी शामिल हो सकते हैं।

बोरिसेन्को के मुताबिक रूस के अपडेटेड सामूहिक सुरक्षा अवधारणा को लेकर खाड़ी देशों की शुरुआती प्रतिक्रियाएं मिल चुकी हैं।खाड़ी देश इसके अध्ययन के साथ इसे लागू करने के तौर-तरीकों पर विचार करने के लिए तैयार हैं। अपडेटेड सामूहिक सुरक्षा अवधारणा पर खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) समूह के मंत्रियों की बैठक में चर्चा हो सकती है।

बोरिसेन्को ने बताया, हमारे अरब साझेदारों ने पहले ही कहा है कि यह विषय इस बैठक में अहम मुद्दा हो सकता है। ईरान सहित क्षेत्र में अपने सभी साझेदारों के साथ इस पर द्विपक्षीय रूप से चर्चा कर रहे हैं। हम किसी भी ऐसे फॉर्मेट के लिए तैयार हैं जो हमारे अरब और ईरानी दोस्तों के लिए सही हो।

उन्होंने कहा कि अगली बैठक की तारीख तय नहीं हुई है लेकिन यह क्षेत्र के किसी देश में होने की उम्मीद है। बहरीन अभी जीसीसी की अध्यक्षता कर रहा है और सऊदी अरब आने वाले समय में इसकी अध्यक्षता संभालेगा।

उल्लेखनीय है कि रूस ने ईरान-अमेरिका तनाव के मद्देनजर फारस की खाड़ी के लिए अपना अपडेटेड सामूहिक सुरक्षा अवधारणा पेश किया है। इसमें संप्रभुता का सम्मान, सैन्य पारदर्शिता, होर्मुज जलडमरूमध्य में स्वतंत्र नौवहन और व्यापक आर्थिक-ऊर्जा सहयोग बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश