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ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग पर पाकिस्तान घिरा, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

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इस्लामाबाद, 22 जुलाई (हि.स.)। पाकिस्तान में ईशनिंदा (ब्लासफेमी) कानूनों के कथित दुरुपयोग को लेकर एक प्रमुख अल्पसंख्यक अधिकार संगठन ने सरकार और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि झूठे आरोपों, भीड़ हिंसा और कमजोर कानूनी कार्रवाई के कारण धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

'वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (वीओपीएम) ने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि ईशनिंदा कानून देश के सबसे विवादास्पद कानूनी मुद्दों में शामिल हैं। संगठन का कहना है कि कई मामलों में आरोपों की सत्यता की जांच होने से पहले ही आरोपित व्यक्ति और उसके परिवार को सामाजिक बहिष्कार, हिंसा और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।

संगठन ने ऐसे मामलों का उल्लेख किया जिनमें बाद में अदालतों ने आरोपों को निराधार या पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया। वीओपीएम ने कहा कि झूठे आरोप लगाने वालों या धार्मिक भावनाओं का कथित रूप से दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कानून के प्रति लोगों का विश्वास कमजोर पड़ता है। संगठन का मानना है कि जवाबदेही की कमी ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति को बढ़ावा देती है।

बयान में पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में अतीत में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हुई भीड़ हिंसा और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया। संगठन ने कहा कि केवल आरोपों के आधार पर भीड़ का कानून हाथ में लेना कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती को दर्शाता है।

संगठन ने पाकिस्तान से मांग की कि न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि धार्मिक कानूनों का इस्तेमाल किसी के खिलाफ व्यक्तिगत प्रतिशोध, राजनीतिक दबाव या निजी लाभ के साधन के रूप में न हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय