पाकिस्तान : शहबाज शरीफ ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल का किया बचाव, पीटीआई पर लगाए आरोप
इस्लामाबाद/पेशावर, 23 अक्टूबर (हि.स.)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के फैसले का बचाव करते हुए इसे बेहद मजबूरी में उठाया गया कदम बताया है। उन्होंने प्रांत में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के लिए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई ) के नेतृत्व वाली पिछली प्रांतीय सरकार को जिम्मेदार ठहराया। इस बीच, संघीय सरकार ने प्रांत में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने के लिए 160 अरब पाकिस्तानी रुपये के विकास पैकेज की घोषणा भी की है।
पाकिस्तान की उर्दू टेलीविज़न चैनल दुनिया न्यूज तथा अंतरराष्ट्रीय मीडिया जिओ न्यूज के मुताबिक, गुरुवार को पेशावर में आयोजित प्रांतीय शीर्ष समिति की बैठक में प्रधानमंत्री ने कानून-व्यवस्था, आतंकवाद विरोधी अभियान और प्रांत में शांति बहाल करने के उपायों की समीक्षा की। बैठक में पाकिस्तान के सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी, उप प्रधानमंत्री इशाक डार, गृह मंत्री मोहसिन नकवी, संघीय मंत्रियों और नवनियुक्त प्रांतीय सलाहकारों ने हिस्सा लिया। बीते 11 अक्टूबर को प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू होने के बाद यह शहबाज शरीफ का खैबर पख्तूनख्वा का यह पहला दौरा था।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि प्रांत में सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार को यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने पीटीआई पर आतंकवाद से निपटने में लापरवाही बरतने और सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्हाेंने कहा कि लगभग छह साल पहले खैबर पख्तूनख्वा शांति का केंद्र बन चुका था, लेकिन अब प्रांत में फिर से उग्रवादी हिंसा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। साथ ही कहा कि संघीय सरकार सैन्य नेतृत्व के सहयोग से प्रांत में शांति और समृद्धि बहाल करने के लिए काम करेगी। प्रधानमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि खैबर पख्तूनख्वा को अन्य प्रांतों के समान विकास के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि आतंकवाद के खिलाफ लंबे संघर्ष के बाद पाकिस्तान में शांति स्थापित होने लगी थी, लेकिन पीटीआई के नेतृत्व वाली पिछली प्रांतीय सरकार ने आतंकवादियों की वापसी की अनुमति देकर स्थिति को फिर बिगड़ने दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों और आम नागरिकों ने भारी बलिदान दिए हैं। उनके मुताबिक, इस संघर्ष में लगभग 80,000 लोगों की जान गई और पाकिस्तान को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ।
शहबाज शरीफ ने पिछली प्रांतीय सरकार पर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक सुरक्षा की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस के करीब 5,000 पद खाली पड़े रहे और ‘सेफ सिटी’ परियोजना भी पूरी नहीं की गई। उन्हाेंने आतंकवाद निरोधक विभाग (सीटीडी) को मजबूत करने, पुलिस प्रशिक्षण और सुरक्षाकर्मियों को आधुनिक हथियार व उपकरण उपलब्ध कराने में कथित लापरवाही को लेकर भी पीटीआई पर निशाना साधा। ये आरोप प्रधानमंत्री ने लगाए हैं; इन पर पीटीआई की प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय वित्त आयोग (एनएफसी ) पुरस्कार के तहत खैबर पख्तूनख्वा को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए 800 अरब पाकिस्तानी रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने 2010 के एनएफसी पुरस्कार का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रांत को आतंकवाद प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्र के रूप में अतिरिक्त संसाधन देने पर सहमति बनी थी। प्रधानमंत्री ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि मिलने के बावजूद प्रांत में उग्रवाद दोबारा क्यों बढ़ रहा है। उन्होंने पिछली प्रांतीय सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। प्रधानमंत्री के दावों के मुताबिक, पेयजल परियोजना में 100 अरब रुपये और कोहिस्तान से जुड़े एक मामले में 37 अरब रुपये के कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा सामने आया है। उन्होंने प्लेसर गोल्ड परियोजना में ठेके चहेते लोगों को दिए जाने का भी आरोप लगाया।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने प्रांत में विकास कार्यों को गति देने के लिए 160 अरब पाकिस्तानी रुपये के पैकेज की घोषणा की। पेशावर में जनजातीय जिलों के प्रतिनिधियों वाली विकास परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि संघीय सरकार खैबर पख्तूनख्वा के लोगों के साथ खड़ी है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के बुजुर्गों ने लंबे समय से विकास कार्यों की कमी, आतंकवाद और भ्रष्टाचार को लेकर चिंता जताई है। प्रधानमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन इलाकों में गेहूं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
बैठक में जनजातीय जिलों में पुलिस प्रशिक्षण, सुरक्षा व्यवस्था और विकास परियोजनाओं में तेजी लाने पर भी चर्चा हुई। सरकार का कहना है कि विकास और सुरक्षा संबंधी पहल को साथ-साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
संघीय सरकार ने प्रांत के 12 आतंकवाद प्रभावित जिलों में विकास परियोजनाओं की निगरानी के लिए अलग ‘क्षेत्र विकास सचिवालय’ स्थापित किया है। इन जिलों में डेरा इस्माइल खान, टैंक, लक्की मरवत, बन्नू, बाजौर, मोहमंद, खैबर, कुर्रम, ओरकजई, अपर साउथ वजीरिस्तान, लोअर साउथ वजीरिस्तान और नॉर्थ वजीरिस्तान शामिल हैं। इसके अलावा, प्रांतीय प्रशासन में गवर्नर की सहायता के लिए 11 सदस्यीय सलाहकार परिषद गठित की गई है। सरकार ने नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत पाकिस्तानी सेना की तैनाती को भी मंजूरी दी है।
संघीय मंत्रिमंडल की सिफारिश पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 11 अक्टूबर को संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत आपातकाल और अनुच्छेद 234 के तहत गवर्नर शासन लागू करने की मंजूरी दी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी, उनकी मंत्रिपरिषद और प्रांतीय सलाहकारों का कार्यकाल समाप्त हो गया तथा प्रशासनिक शक्तियां गवर्नर फैसल करीम कुंडी को सौंप दी गईं। केंद्र सरकार ने फैसले के पीछे बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और आतंकवाद विरोधी अभियानों में तत्कालीन पीटीआई नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार के कथित अपर्याप्त सहयोग को वजह बताया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा के लोगों ने वर्षों तक आतंकवाद और बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना किया है। उन्होंने प्रांत में शांति, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता देने का वादा किया। उन्हाेंने कहा कि संघीय सरकार सैन्य नेतृत्व और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था सुधारने और लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए काम करेगी।
हालांकि, प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के फैसले के राजनीतिक और संवैधानिक प्रभावों के साथ-साथ विकास पैकेज के वास्तविक क्रियान्वयन पर भी नजर रहेगी। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि सरकार की सुरक्षा और विकास संबंधी घोषणाएं जमीनी स्तर पर कितना बदलाव ला पाती हैं।
--------------------
हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

