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हिंदू कुश पर्वतमाला के फारगाम आन दर्रे को पार कर महिला पर्वतारोहियों ने रचा इतिहास

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हिंदू कुश पर्वतमाला के फारगाम आन दर्रे को पार कर महिला पर्वतारोहियों ने रचा इतिहास


- लासपुर घाटी व गोलैन घाटी को जोड़ने वाला यह दर्रा 27 साल बाद खुला था

इस्लामाबाद, 22 जुलाई (हि.स.)। पाकिस्तान के एक पर्वतारोहण दल ने 27 वर्षों बाद हिंदू कुश पर्वतमाला के दुर्गम फारगाम आन दर्रे को सफलतापूर्वक पार कर इतिहास रच दिया। इस अभियान की खास बात यह रही कि पहली बार महिला पर्वतारोहियों ने भी इस दर्रे को पार कर इसकी चोटी तक पहुंचने में सफलता हासिल की। लगभग 5100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा ऊपरी चित्राल की लासपुर घाटी और निचली चित्राल की गोलैन घाटी को जोड़ता है।

मीडिया रिपाेर्ट में अधिकारियों के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा संस्कृति एवं पर्यटन प्राधिकरण (केपीसीटीए) के सहयोग से संचालित इस अभियान ने ऊपरी चित्राल की लासपुर घाटी और निचली चित्राल की गोलैन घाटी को जोड़ने वाले ऐतिहासिक पर्वतीय मार्ग को 27 साल बाद फिर से खोल दिया। पर्वतारोहियों को चोटी तक पहुंचने के लिए ग्लेशियरों, बर्फ से ढकी खड़ी ढलानों, ढीली चट्टानों और हिमस्खलन की आशंका वाले खतरनाक क्षेत्रों से होकर गुजरना पड़ा। इसके बाद दल सुरक्षित रूप से गोलैन घाटी में उतरा।

अभियान के दौरान कामरान खान सबसे पहले चोटी पर पहुंचे। उनके साथ मेहरुश अख्तर, समर खान, नोमान खान, नूरमल रहमान, जोहैब खान, उमर खिताब शीरानी, सोहनिया बाबर, अमीना शब्बीर और मदीहा सैयद ने भी सफलता हासिल की। इस अभियान में महिला पर्वतारोहियों ने पहली बार फारगाम आन दर्रे को पार कर नया इतिहास रचा। मेहरुश अख्तर के अलावा चित्राल की रहने वाली बहनें स्मेल रोज और मधुशाला अख्तर भी इस ऐतिहासिक अभियान का हिस्सा रहीं।

स्थानीय गाइड ज़मुरद खान के नेतृत्व में अभियान दल ने बताया कि पिछले 27 वर्षों में ग्लेशियरों के पीछे हटने, चट्टानों के खिसकने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से इस मार्ग की भौगोलिक स्थिति में काफी बदलाव आ चुका है, जिससे अभियान और अधिक चुनौतीपूर्ण बन गया। अभियान के दौरान पर्वतारोहियों को ऑस्ट्रियाई पर्वतारोही जॉर्ज क्रोनबर्गर की स्मृति में स्थापित एक मेमोरियल प्लाक भी मिला। वर्ष 1975 में इसी क्षेत्र में पर्वतारोहण के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।

अधिकारियों के मुताबिक, यह अभियान केपीसीटीए के 'तिरिच मीर प्रोजेक्ट' का हिस्सा है। इस परियोजना का उद्देश्य ऐतिहासिक ट्रेकिंग मार्गों की पहचान, उनका दस्तावेजीकरण और ऊपरी चित्राल में टिकाऊ एडवेंचर पर्यटन को बढ़ावा देना है। प्राधिकरण का मानना है कि 'फारगाम आन दर्रे' के दोबारा खुलने से क्षेत्र में पर्वतारोहण और साहसिक पर्यटन को नई पहचान मिलेगी, साथ ही इसकी ऐतिहासिक खोज-यात्रा की विरासत को भी संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

गाैरतलब है कि हिंदू कुश पर्वतमाला के अंतर्गत आने वाला फारगाम आन दर्रा मुख्य रूप से 1999 के आसपास बंद हुआ था। यह 5,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक ऐतिहासिक ट्रेकिंग मार्ग है। भीषण ग्लेशियरों, बदलते पहाड़ी मौसम और हिमस्खलन के खतरों के कारण यह मार्ग पिछले 27 वर्षों से किसी भी आधिकारिक पर्वतारोहण अभियान के लिए पूरी तरह बंद था। इसके अलावा अगस्त 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी और अफगानिस्तान में तालिबान शासन के आने के बाद, वाखान कॉरिडोर और पूरे हिंदू कुश क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और पर्वतारोहण पर पूरी तरह रोक लग गई थी। अब ई-वीजा शुरू होने के बाद से धीरे-धीरे खुल रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी