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पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 100 से ज्यादा रॉकेट दागे, गोलीबारी में सैकड़ों लोग विस्थापित

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पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 100 से ज्यादा रॉकेट दागे, गोलीबारी में सैकड़ों लोग विस्थापित


काबुल, 22 मार्च (हि.स.)। पाकिस्तान ने पिछले तीन दिनों में अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में 100 से ज्यादा रॉकेट दागे हैं। इससे आम नागरिकों के घरों को नुकसान पहुंचा है। अफगानिस्तान के कुनार प्रांत के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पिछले तीन दिनों में पाकिस्तान ने नारी और मनोगई जिलों को निशाना बनाकर संघर्ष विराम (सीज फायर) का उल्लंघन किया है। पाकिस्तान सेना की गोलीबारी से आजिज सैकड़ों लोग विस्थापित हो गए हैं।

कुनार प्रांत अफगानिस्तान के पूर्वोत्तर में है। यह पाकिस्तान की सीमा से लगा हुआ है। यह क्षेत्र हिंदू कुश पर्वत शृंखलाओं और कुनार नदी घाटी के लिए जाना जाता है। अपनी दुर्गम पहाड़ी भौगोलिक स्थिति के कारण सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। कुनार के उत्तर में नूरिस्तान प्रांत , पश्चिम में लघमान और दक्षिण में नंगरहार प्रांत हैं।

तुलूअ न्यूज (टोलो न्यूज) की रिपोर्ट के अनुसार, कुनार सूचना और संस्कृति विभाग के सूचना प्रमुख जिया-उर-रहमान स्पिन घर ने कहा, '' संघर्ष विराम के दौरान पाकिस्तान ने नारी और मनोगई जिलों में काल्पनिक डूरंड रेखा के पास के इलाकों में 100 से अधिक रॉकेट हमले किए। इससे कई निवासियों को आर्थिक नुकसान हुआ, हालांकि किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।''

नूरिस्तान के गवर्नर के प्रवक्ता फरीदौन समीम ने कहा, ''पहले प्रतिदिन दर्जनों वाहन इस रास्ते का इस्तेमाल करते थे और एम्बुलेंस भी यहां से गुजरती थीं। अब पाकिस्तान की सेना लोगों को यात्रा करने की अनुमति नहीं देती है। जो कोई भी इस रास्ते का इस्तेमाल करता है उस पर गोलीबारी की जाती है।''

इस बीच, नूरिस्तान के कामदेश और बर्ग-ए-मतल जिलों के निवासियों का कहना है कि संघर्ष के कारण सड़कें बंद हो गई हैं। इससे उन्हें गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रा के दौरान पाकिस्तान की सेना उन्हें निशाना बनाती है। एक निवासी ने कहा, ''जो कोई भी नूरिस्तान जाने के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल करता है उस पर गोली चलाई जाती है और उसे आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाती है।''

कुनार केअधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान की सेना की छिटपुट गोलाबारी के कारण काल्पनिक डूरंड रेखा के पास के इलाकों से लगभग 7,500 परिवार विस्थापित हो गए हैं और अब कुनार नदी के किनारे तंबुओं में रह रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद