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उत्तर कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण ट्रंप प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता : अमेरिकी राजनयिक

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उत्तर कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण ट्रंप प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता : अमेरिकी राजनयिक


सियाेल/वॉशिंगटन, 19 जून (हि.स.)। अमेरिकी विदेश विभाग के उप सहायक सचिव डेविड विलेज़ोल ने कहा है कि उत्तर कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं में बहुत ऊपर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की उत्तर कोरिया नीति का केंद्र बिंदु परमाणु निरस्त्रीकरण ही है।

दक्षिण कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी योनहाप न्यूज के अनुसार, जापान, कोरिया और मंगोलिया मामलों के प्रभारी विलेज़ोल ने ट्राइ फोरम द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि यदि उत्तर कोरियाई राष्ट्रपति किम जोंग-उन बातचीत के लिए तैयार होते हैं तो ट्रंप प्रशासन भी वार्ता के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ताकत के जरिए शांति की नीति जारी रखेगा और उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ उसके साइबर अपराधों और क्रिप्टो करेंसी चोरी जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए सहयोगियों के साथ काम करेगा।

गाैरतलब है कि, ट्राइफोरम एक गैर-लाभकारी संगठन है जो दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के बीच त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ाने का प्रयास करता है।

विलेज़ोल ने बताया कि पिछले महीने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शिखर सम्मेलन के दौरान दाेनाें नेताओं ने उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई थी और इस सप्ताह फ्रांस में जी-7 देशों के नेताओं ने भी ऐसा ही किया।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है और अपने परमाणु दर्जे को अपरिवर्तनीय बता रहा है। किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग ने भी जी-7 देशों द्वारा दोहराई गई परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग को खारिज करते हुए इसे ऐसी लक्ष्मण रेखा बताया जिसे पार नहीं किया जा सकता।

विलेज़ोल ने दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल (ऑपकॉन) सौंपने के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस विषय पर अमेरिका अपनी सैन्य नेतृत्व की राय को विशेष महत्व देगा और प्रक्रिया को सोच-समझकर और सावधानी से आगे बढ़ाया जाएगा।

विलेज़ोल की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सियोल को उम्मीद है कि वह जल्द ही, शायद 2028 के अंत से पहले, युद्ध के समय का ऑपकॉन वापस ले लेगा। हालाँकि, यूएस फोर्सेज़ कोरिया (यूएसएफके) के कमांडर जनरल ज़ेवियर ब्रंसन ने हाउस की सुनवाई में कहा है कि दोनों सहयोगी देशों का लक्ष्य 2029 की पहली तिमाही तक ज़रूरी शर्तें पूरी करना है।

दक्षिण कोरिया ने 1950-53 के कोरियाई युद्ध के दौरान अपनी सेना का ऑपरेशनल कंट्रोल अमेरिका के नेतृत्व वाली संयुक्त राष्ट्र कमांड को सौंप दिया था। बाद में, 1978 में जब सहयोगी देशों की 'कंबाइंड फोर्सेज़ कमांड' शुरू हुई तो इसे उस कमांड को सौंप दिया गया। सियोल ने 1994 में शांति के समय का ऑपकॉन वापस ले लिया था लेकिन युद्ध के समय का ऑपकॉन अभी भी अमेरिका के हाथों में है।

अमेरिकी कंपनियों के लिए दक्षिण कोरिया के कारोबारी माहौल पर टिप्पणी करते हुए विलेज़ोल ने कहा कि अमेरिकी कंपनियों के साथ कभी-कभी होने वाले भेदभावपूर्ण व्यवहार को लेकर अभी और काम करने की जरूरत है लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सियोल और वॉशिंगटन के रिश्ते बहुत मजबूत हैं।

ज़ाहिर है, वह ई-कॉमर्स कंपनी 'कूपैंग इंक' के मामले का ज़िक्र कर रहे थे, जो दक्षिण कोरिया में बड़े पैमाने पर डेटा लीक होने के बाद जांच के दायरे में आ गई थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी