नेपाल सरकार के ट्रेड यूनियन को खारिज करने के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
काठमांडू, 11 मई (हि.स.)। नेपाल के उच्चतम न्यायालय ने सरकारी कर्मचारियों के आधिकारिक ट्रेड यूनियन को खारिज करने संबंधी सरकार के निर्णय को तत्काल लागू न करने का आदेश दिया है। सोमवार को संवैधानिक बेंच की सुनवाई में बहुमत के आधार पर इस निर्णय के कार्यान्वयन पर रोक लगाते हुए अल्पकालीन अंतरिम आदेश जारी किया गया।
कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल, न्यायाधीश कुमार रेगमी और हरि प्रसाद फुयाल ने सरकार द्वारा अध्यादेश के माध्यम से कानून संशोधन कर ट्रेड यूनियन खारिज करने के फैसले को फिलहाल लागू न करने का आदेश दिया।
हालांकि संवैधानिक बेंच में रहे दो अन्य न्यायाधीश विनोद शर्मा और शारंगा सुवेदी ने एकतरफा सुनवाई के आधार पर अल्पकालीन अंतरिम आदेश जारी करने का विरोध करते हुए अलग मत दर्ज कराया।
अध्यादेश के जरिए कानून संशोधन कर ट्रेड यूनियन खारिज किए जाने के खिलाफ नेपाल सिविल सर्वेंट एसोशिएशन की केंद्रीय कार्य समिति की ओर से अध्यक्ष भवानी शर्मा समेत ने रिट याचिका दायर की थी।
रिट पर सुनवाई करते हुए संवैधानिक इजलास ने सरकार को सात दिनों के भीतर लिखित जवाब पेश करने का आदेश भी दिया है।
सरकार के सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश जारी किए जाने के बाद संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय द्वारा ट्रेड यूनियन को खारिज करने और देशभर में रहे सभी ट्रेड यूनियन के कार्यालय को बंद करने की सूचना जारी की गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि यह निर्णय नेपाल के संविधान की धारा 1, 34, 93 और 114 के विपरीत है, इसलिए इसे असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं और वरिष्ठ अधिवक्ताओं का तर्क है कि कानून में आधिकारिक ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधित्व की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है तथा धारा 53 में सरकारी कर्मचारियों के ट्रेड यूनियन संबंधी प्रावधान हैं।
अदालत के आदेश में कहा गया है कि यह व्यवस्था संविधान की धारा 17 के तहत संघ-संस्था खोलने की स्वतंत्रता तथा धारा 34(3) के तहत ट्रेड यूनियन बनाने, उसमें भाग लेने और सामूहिक सौदेबाजी करने के संवैधानिक अधिकार से जुड़ी हुई है। इसलिए फिलहाल इससे संबंधित अध्यादेश को लागू न करने का आदेश दिया जाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

