नेपाल : सरकार ने स्कूली छात्रों पर टैक्स लगाया, निजी विद्यालयों के संगठन ने दिखाई उदारता
काठमांडू, 21 जुलाई (हि.स.)। नेपाल सरकार द्वारा निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों से वसूले जाने वाले सभी प्रकार के शुल्क पर 3 प्रतिशत ‘शिक्षा समता शुल्क’ लागू किए जाने के बाद निजी एवं आवासीय विद्यालयों के संगठन ने अपने सदस्य स्कूलों से फिलहाल 3 प्रतिशत टैक्स जोड़कर अभिभावकों को बिल न भेजने की अपील की है।
सरकार के नए प्रावधान के तहत निजी विद्यालयों, कॉलेजों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों सहित निजी क्षेत्र के सभी शिक्षण संस्थानों द्वारा छात्रों से लिए जाने वाले सभी प्रकार के शुल्क पर 3 प्रतिशत शिक्षा समता शुल्क लगाया गया है।
हालांकि, कई स्कूलों द्वारा अभिभावकों को 3 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क सहित बिल भेजना शुरू करने के बाद निजी स्कूलों के संगठन ने स्कूलों से ऐसा न करने का अनुरोध किया है।
निजी स्कूल संचालक संगठन के महासचिव आरबी कटुवाल ने कहा, हमने फिलहाल स्कूलों से 3 प्रतिशत कर जोड़कर बिल न भेजने का आग्रह किया है, क्योंकि सभी अभिभावक यह अतिरिक्त राशि वहन करने में सक्षम नहीं हैं। हमने सरकार से भी इस कर को वापस लेने का अनुरोध किया है और हमें विश्वास है कि सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करेगी।
उन्होंने कहा कि यदि किसी अभिभावक ने 3 प्रतिशत कर सहित बिल का भुगतान कर भी दिया है और बाद में सरकार यह निर्णय वापस लेती है, तो अतिरिक्त राशि वापस कर दी जाएगी।
कटुवाल ने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि यह फैसला संविधान की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों को इस तरह आर्थिक दंड नहीं दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, जो अभिभावक हर महीने 20 से 50 हजार रुपये फीस दे सकते हैं, उनके लिए यह अतिरिक्त शुल्क बड़ी समस्या नहीं होगी। लेकिन सीमित आय के बावजूद अपने बच्चों को निजी विद्यालय में पढ़ाने वाले परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। सरकार ने ऐसे अभिभावकों को निजी विद्यालय चुनने के लिए दंडित किया है।
उन्होंने कहा कि जनता से सीधे जुड़े ऐसे संवेदनशील विषयों पर सरकार को बिना व्यापक परामर्श के निर्णय नहीं लेना चाहिए और इस फैसले को तुरंत वापस लेना चाहिए।
विधेयक के अनुसार अब केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण और पुनर्ताजगी (रिफ्रेशर) प्रशिक्षण देने वाली संस्थाओं को छोड़कर निजी क्षेत्र द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों तथा अन्य सभी निजी शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को भी यह 3 प्रतिशत शिक्षा समता शुल्क देना होगा।
हालांकि, गैर-लाभकारी सार्वजनिक शैक्षिक ट्रस्टों के तहत संचालित शिक्षण संस्थानों को इस शिक्षा समता शुल्क से छूट दी गई है।
सरकार के इस निर्णय का विभिन्न स्तरों पर विरोध शुरू हो गया है। संविधान द्वारा नागरिकों के मौलिक अधिकार के रूप में सुनिश्चित शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर अतिरिक्त कर लगाए जाने के बाद अभिभावकों, छात्र संगठनों, निजी शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य संस्थानों के संचालकों तथा उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

