नेपाल सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ में नहीं हो पाई रवि लामिछाने के आरोप संशोधन मामले में सुनवाई
काठमांडू, 23 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल के सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रवि लामिछाने के खिलाफ विभिन्न जिला अदालतों में लंबित मामलों में आरोपपत्र संशोधन संबंधी निर्णय के खिलाफ दायर रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ में गुरूवार को सुनवाई नहीं हो पाई। इस रिट पर आज सुनवाई तय थी, लेकिन सरकारी वकील की मांग पर इसे टाल दिया गया।
लामिछाने के खिलाफ सहकारी ठगी, संगठित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में आरोप संशोधन करने के अटॉर्नी जनरल के फैसले के खिलाफ दायर इस रिट पर आज पूर्ण पीठ में सुनवाई होनी थी। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विनोद शर्मा और अब्दुल अजीज मुसलमान की संयुक्त पीठ ने 29 मार्च को यह मामला पूर्ण पीठ में भेजते हुए कहा था कि इस विवाद में गंभीर संवैधानिक और कानूनी व्याख्या की आवश्यकता है।
संयुक्त पीठ ने ‘अतिरिक्त प्रमाण’ की गलत व्याख्या की आशंका जताते हुए कहा था कि इस मामले की सुनवाई पूर्ण पीठ में की जानी चाहिए। मुलुकी फौजदारी कार्यविधि संहिता की धारा 36 के अनुसार केवल अतिरिक्त प्रमाण मिलने पर ही आरोपों में संशोधन किया जा सकता है। हालांकि, अदालत ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या इस मामले में प्रतिवादी रवि लामिछाने के स्वयं दिए गए निवेदन या किसी स्वघोषणा को ही ‘अतिरिक्त प्रमाण’ माना जा सकता है या नहीं। साथ ही जिला अदालत के अधिकार क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है या नहीं। इस मुद्दे पर भी विस्तृत कानूनी व्याख्या की आवश्यकता बताई गई है।
आरोप संशोधन की अंतिम अनुमति संबंधित जिला अदालत के पास होती है। ऐसे में, जिला अदालत के निर्णय से पहले सर्वोच्च अदालत इस मामले में हस्तक्षेप कर सकती है या नहीं—इस तकनीकी और कानूनी प्रश्न का अंतिम फैसला अब पूर्ण पीठ करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

