पूर्व उपप्रधानमंत्री रवि लामिछाने के केस वापस लिए जाने पर अदालत ने मांगा जवाब
काठमांडू, 25 जनवरी (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व उपप्रधानमंत्री रवि लामिछाने को सरकार के द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध के मामले से बरी किए जाने को लेकर नए साक्ष्य पेश करने को कहा है।
रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने उस नए साक्ष्य को अदालत में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है, जिसके आधार पर महा न्यायाधिवकत्ता कार्यालय ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष समेत रहे रवि लामिछाने और उनके व्यावसायिक साझेदारों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध से जुड़े मामलों को वापस लेने की मंजूरी दी थी।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार शर्मा और श्रीकांत पौडेल की संयुक्त पीठ ने यह आदेश जारी करते हुए महान्यायाधिवक्ता कार्यालय को निर्देश दिया कि वह उन सभी फाइलों को अदालत में पेश करे, जिनमें वह नया साक्ष्य शामिल है, जिसके आधार पर आरोप पत्र में संशोधन कर मामले वापस लिए गए।
यह आदेश महा न्यायाधिवक्ता सविता भंडारी की दलीलों के बाद दिया गया। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोप पत्र दायर किए जाने के बाद अतिरिक्त साक्ष्य मिले, जिसके कारण उसमें संशोधन करने का निर्णय लिया गया।
पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सरकार के द्वारा यह प्रस्तुत किए जाने के मद्देनजर कि आरोप पत्र दाखिल होने के बाद अतिरिक्त साक्ष्य मिले और उसी के आधार पर उसमें संशोधन का निर्णय लिया गया, ऐसे संशोधन से संबंधित मूल दस्तावेज और साक्ष्य अंतरिम आदेश पर चर्चा हेतु कानून के अनुसार प्रस्तुत किए जाएं।
महा न्यायाधिवक्ता भंडारी ने अदालत में उपस्थित होकर लामिछाने और उनके साझेदारों के खिलाफ मामले वापस लेने के फैसले का बचाव कर रहे थे। इन पर सहकारी धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में आरोप हैं।
रवि लामिछाने की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील पंत और रमन श्रेष्ठ ने बहस की, जबकि याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी और टीकाराम भट्टराई ने पक्ष रखा।
महा न्यायाधिवक्ता कार्यालय ने लामिछाने के खिलाफ गंभीर आरोप वापस लेने का निर्णय लिया था, जिसे आलोचकों ने मौजूदा सरकार के राजनीतिक समर्थन से लिया गया कदम बताया है।
इस निर्णय को चुनौती देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिपाठी, विधि छात्र आयुष बादल और युवराज पौडेल ‘सफल’ ने रिट याचिकाएं दायर कर इसे रद्द करने की मांग की। याचिकाओं में कहा गया है कि यह फैसला “प्रथम दृष्टया अवैध, दुर्भावनापूर्ण और मनमाना” है।
रविवार को अदालत ने दोनों पक्षों को बुलाकर यह विचार किया कि क्या अंतरिम आदेश जारी किया जाए। महा कन्यायाधिवक्ता के दलीलों के बाद पीठ ने आगे की कार्यवाही से पहले संबंधित साक्ष्य तलब करने का आदेश दिया।
अब महा न्यायाधिवक्ता कार्यालय द्वारा मांगे गए दस्तावेज़ प्रस्तुत किए जाने के बाद ही मामले में आगे की सुनवाई होगी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

