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नेपाल के सत्तारूढ़ दल के सांसदों के भाषण पर लगाम, सदन में बोलने से पहले 'स्पीच नोट' जमा करना अनिवार्य

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नेपाल के सत्तारूढ़ दल के सांसदों के भाषण पर लगाम, सदन में बोलने से पहले 'स्पीच नोट' जमा करना अनिवार्य


काठमांडू, 08 जुलाई (हि.स.)। नेपाल के सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) ने अपने सांसदों के भाषण, भाषा और संसदीय प्रस्तुति पर निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। पार्टी का मानना है कि सांसदों की संसदीय भूमिका अपेक्षा के अनुरूप प्रभावी नहीं रही है, इसलिए यह कदम उठाया गया है। इसी के तहत आरएसपी ने अपने सांसदों को निर्देश दिया है कि संसद में बोलने से पहले वे अपने भाषण की विषयवस्तु संसदीय दल के पदाधिकारियों को अवश्य भेजें। संसदीय दल ने इस संबंध में सांसदों को औपचारिक परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया है।

आरएसपी की मुख्य सचेतक क्रान्तिशिखा धिताल ने बताया कि सांसदों की संसदीय भूमिका को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने कहा, विशेष समय और शून्य समय में कई सांसद निर्धारित समय में अपनी बात पूरी नहीं कर पाते और विषय को सटीक ढंग से प्रस्तुत करने में कठिनाई होती है। इसी कारण पहले से विषयवस्तु देखने की व्यवस्था की गई है।

धिताल ने स्पष्ट किया कि पार्टी सांसदों को नियंत्रित करना नहीं चाहती। उनके अनुसार, विशेष समय और शून्य समय में प्रस्तुत किए जाने वाले सभी भाषणों का मसौदा संसदीय दल के पदाधिकारियों को पहले से भेजना अनिवार्य किया गया है। सांसदों को भेजे गए परिपत्र में कहा गया है, अब से शून्य समय तथा विशेष समय में प्रस्तुत की जाने वाली अपनी सामग्री (स्पीच नोट) अनिवार्य रूप से मुख्य सचेतक क्रान्तिशिखा धिताल तथा सचेतक प्रकाशचन्द्र परियार को एक दिन पहले ही भेजें।

हालांकि, इस निर्देश के बाद पार्टी पर सांसदों के विशेषाधिकारों को सीमित करने का आरोप भी लगने लगा है। चितवन महाधिवेशन के बाद आरएसपी के भीतर तीन अलग-अलग धड़े उभरने की चर्चा है और सांसदों के बीच भी मतभेद दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी संसद में एक समान और नियंत्रित रुख प्रस्तुत करने के लिए 'एक-द्वार नीति' अपनाना चाहती है।

सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद आरएसपी के कई सांसद सरकार की खुलकर आलोचना करने लगे हैं। कुछ सांसदों ने संसद में गृहमंत्री सुधन गुरूंग के इस्तीफे की मांग की थी, जबकि भूमिहीन लोगो के प्रबंधन में सरकार की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल उठाए थे।

मुख्य सचेतक क्रान्तिशिखा धिताल ने भी हाल ही में कहा था कि सरकार भूमिहीन लोगो के प्रबंधन में पूरी तरह विफल रही है और भूमिहीनों के आंसू सरकार को झकझोरने वाले हैं। इसके तुरंत बाद सांसदों को एक दिन पहले 'स्पीच नोट' जमा कराने का निर्देश दिए जाने को राजनीतिक हलकों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास