भारत दौरे से लौटे विदेश मंत्री शिशिर खनाल बोले- अगले कुछ महीनों में नेपाल और भारत के बीच हो सकते हैं उच्चस्तरीय दौरे
काठमांडू, 07 जून (हि.स.)। तीन दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा पूरी कर रविवार दोपहर काठमांडू लौटे नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि आने वाले कुछ महीनों में नेपाल और भारत के बीच उच्चस्तरीय दौरों का आदान-प्रदान हो सकता है।
भारत यात्रा के दौरान विदेश मंत्री खनाल ने भारत के विदेश मंत्री डा एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। बातचीत में व्यापार, निवेश, आधारभूत संरचना, संपर्क (कनेक्टिविटी), ऊर्जा तथा जन-से-जन संबंधों सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
काठमांडू लौटने के बाद पत्रकारों से बातचीत में खनाल ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच आगामी उच्चस्तरीय दौरों की संभावना पर भी चर्चा हुई है।
उन्होंने कहा, “नेपाल और भारत दोनों देशों की ओर से अगले कुछ महीनों के भीतर उच्चस्तरीय यात्राएं हो सकती हैं। इसके लिए आवश्यक तैयारियों पर भी चर्चा हो चुकी है।”
विदेश मंत्री ने बताया कि उनकी बैठकों के दौरान सीमा संबंधी मुद्दे, विशेषकर लंबे समय से लंबित सीमा विवाद, भी चर्चा के प्रमुख विषय रहे। खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ हुई वार्ता में इस विषय पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
खनाल ने कहा कि नेपाल ने पहले भी कूटनीतिक माध्यम से लिपुलेख-कालापानी क्षेत्र के रास्ते मानसरोवर यात्रा मार्ग खोले जाने पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी, क्योंकि नेपाल इस क्षेत्र को अपना भूभाग मानता है।
उनके अनुसार, दोनों देशों ने सीमा संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए कूटनीतिक संवाद और मौजूदा द्विपक्षीय तंत्रों के माध्यम से चर्चा जारी रखने पर सहमति व्यक्त की है। इसमें सीमांकन से जुड़े मामलों के समाधान हेतु क्षेत्रीय स्तर पर सर्वेक्षण कार्य को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है।
खनाल ने कहा कि नेपाल ऐतिहासिक दस्तावेजों और 1816 की सुगौली संधि के आधार पर सीमा विवाद का समाधान चाहता है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इस प्रकार के सीमा विवादों के समाधान में सामान्यतः समय लगता है।
उन्होंने यह भी दोहराया कि नेपाल द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान के लिए किसी भी स्तर पर संवाद करने के लिए तैयार है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

