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नेपाल में हिंदूवादी संगठनों ने सरकार के सामने रखीं 15 मांगें, दोषियों की गिरफ्तारी से लेकर हिंदू राष्ट्र की बहाली तक की मांग

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नेपाल में हिंदूवादी संगठनों ने सरकार के सामने रखीं 15 मांगें, दोषियों की गिरफ्तारी से लेकर हिंदू राष्ट्र की बहाली तक की मांग


काठमांडू, 01 अगस्त (हि.स.)। नेपाल के विभिन्न हिंदूवादी संगठनों ने हालिया घटनाओं के बाद सरकार के समक्ष हिन्दू राष्ट्र की मांग सहित 15 सूत्रीय मांगपत्र पेश किया है। इन मांगों में घटना के दोषियों और कथित साजिशकर्ताओं की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच, मृतकों के परिजनों को मुआवजा, घायलों के लिए मुफ्त इलाज तथा मृतकों को शहीद घोषित करने जैसी मांगें शामिल हैं।

संगठनों ने मांग की है कि घटना की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और गोली चलाने का आदेश देने वाले अधिकारियों तथा घटना के कथित योजनाकारों की पहचान उजागर की जाए। साथ ही प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा में हुई चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

मांगपत्र में देशभर की मस्जिदों, मदरसों तथा मठ-मंदिरों की उच्चस्तरीय जांच और निगरानी करने, उनके वित्तीय स्रोतों की जांच कराने तथा घटना के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारणों की भी जांच कराने की मांग की गई है।

हिंदूवादी संगठनों ने नेपाल को बौद्ध और किरात परंपराओं सहित ‘वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र’ के रूप में पुनः स्थापित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की मांग भी उठाई है।

इसके अलावा मुस्लिम आयोग को भंग करने, मदरसों और अन्य धार्मिक शिक्षण संस्थानों की जांच कर अवैध पाए जाने वाले संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने तथा देशभर की मस्जिदों से लाउडस्पीकर स्थायी रूप से हटाने की मांग भी की गई है।

मांगपत्र में रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से निष्कासित करने, सीमा सुरक्षा कड़ी करने तथा वर्ष 1990 के बाद जारी सभी नेपाली नागरिकताओं की जांच कराने की भी मांग शामिल है।

संगठनों ने गृह मंत्रालय के तहत संचालित हज यात्रा समिति को समाप्त करने, प्रधानमंत्री के सलाहकार एवं संविधान संशोधन संयोजक मो. आसिम शाह को तत्काल पदमुक्त करने तथा धार्मिक आयोजनों में हथियारों का प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।

इसके साथ ही सुनसरी के देवानगंज घटना के बाद हुए आंदोलन के दौरान गिरफ्तार लोगों के मामलों की समीक्षा कर उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत रिहा करने तथा सोशल मीडिया के माध्यम से हिंसा, नफरत या उग्रवादी विचार फैलाने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास