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नेपाल सरकार का २०३५ तक २४,५०० मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य

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नेपाल सरकार का २०३५ तक २४,५०० मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य


काठमांडू , 27 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल सरकार ने वर्ष २०३५ तक सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संयुक्त निवेश से कुल 24,500 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखते हुए ‘ऊर्जा खपत वृद्धि तथा निर्यात रणनीति सार्वजनिक की है। इस रणनीति में पहले से प्रस्तावित, अध्ययन किए गए, निर्माणाधीन और निर्माण के लिए तैयार परियोजनाओं को शामिल किया गया है।

जलाशय और अर्ध-जलाशय आधारित परियोजनाओं के अलावा सौर्य ऊर्जा परियोजनाओं को भी इस रणनीति में शामिल किया गया है। रणनीति के अनुसार बहुचर्चित बुढीगण्डक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को वर्ष 20३० तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। करीब 1,200 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना के निर्माण की तैयारी चल रही है। निवेश मॉडल तय हो चुका है, लेकिन अभी इसका कार्यान्वयन शुरू नहीं हुआ है। सरकार ने इसे प्राथमिकता में रखा है।

रणनीति में कहा गया है कि निकट भविष्य में रघुगंगा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पूरा होगा। 40 मेगावाट क्षमता वाली यह परियोजना निर्माण के अंतिम चरण में है।

इसी तरह 140 मेगावाट क्षमता वाली तनहु हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को वित्तीय वर्ष २०२८ तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रणनीति के अनुसार, 42 मेगावाट क्षमता वाली अपर मोदी ए, 18.2 मेगावाट क्षमता वाली अपर मोदी और 37 मेगावाट क्षमता वाली अपर त्रिशूली 3 बी परियोजना भी पूरी की जाएगी।

निर्माण की तैयारी में मौजूद 670 मेगावाट क्षमता वाली दुधकोशी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को वर्ष २०३२ तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा 1,061 मेगावाट क्षमता वाली अपर अरुण हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और 417 मेगावाट क्षमता वाली नलगाड़ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी उसी वर्ष तक पूरा करने की योजना है। वहीं, 490 मेगावाट क्षमता वाली अरुण चतुर्थ और 439 मेगावाट क्षमता वाली बेतन कर्णाली जलविद्युत परियोजना को वर्ष २०३२ तक पूरा किया जाएगा।सरकार का लक्ष्य 210 मेगावाट क्षमता वाली चैनपुर सेती परियोजना को वर्ष 20३० तक पूरा करना है।

इसके अलावा 99 मेगावाट क्षमता वाली तामाकोशी पंचम, 281 मेगावाट क्षमता वाली नौमुरे और 828 मेगावाट क्षमता वाली उत्तरगंगा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। उत्तरगंगा परियोजना को वर्ष 2092 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण द्वारा प्रवर्द्धित 1,000 मेगावाट क्षमता वाली सौर्य परियोजनाएं वर्ष 20२८ तक पूरी होंगी।

निजी क्षेत्र के निवेश से सौर्य परियोजनाओं का चयन प्रतिस्पर्धा के आधार पर किया जा रहा है। ऊर्जा मिश्रण की अवधारणा को लागू करने के लिए सौर्य परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा सरकारी कंपनियों, नेपाल विद्युत प्राधिकरण और अन्य सहायक कंपनियों द्वारा विकसित 3,500 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं भी वर्ष २०३५ तक पूरी होंगी।

निजी क्षेत्र द्वारा प्रवर्द्धित सौर्य और निर्यात केंद्रित परियोजनाएं भी उसी समय तक पूरी की जाएंगी। इन परियोजनाओं की कुल क्षमता 14,000 मेगावाट है।सरकार का लक्ष्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना, व्यापार विस्तार करना और बिजली निर्यात को बढ़ावा देना है। रणनीति में 14 आंतरिक ट्रांसमिशन लाइन और 10 अंतरदेशीय ट्रांसमिशन लाइन बनाने का लक्ष्य रखा गया है। भूमिगत वितरण प्रणाली वर्ष 20२७ तक पूरी की जाएगी।

घरेलू स्तर पर इलेक्ट्रिक चूल्हों के विस्तार के लिए सब्सिडी दी जाएगी। देशभर में चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार कर परिवहन क्षेत्र को इलेक्ट्रिक बनाने की योजना है। साथ ही कोयला आधारित बॉयलरों को इलेक्ट्रिक बॉयलरों में बदला जाएगा। कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए बिजली शुल्क में रियायत दी जाएगी और सिंचाई के लिए 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक पंप में बदलाव किया जाएगा। इसके अलावा रासायनिक उर्वरक और डेटा सेंटर जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों के संचालन के लिए विशेष बिजली दर तय करने की भी सरकार की योजना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास