नेपाल की बाढ़ पर 44 अल्पविकसित देशों की एकजुटता, जलवायु न्याय की उठी मांग
काठमांडू, 05 सितंबर (हि.स.)। नेपाल समेत जलवायु परिवर्तन से गंभीर आपदाओं का सामना कर रहे देशों के समर्थन में 44 अल्पविकसित देशों ने सामूहिक रूप से जलवायु न्याय की मांग उठाई है। टिमोर-लेस्ते की राजधानी दिली में आयोजित सम्मेलन में इन देशों ने भोटेकोशी बाढ़ से हुई तबाही पर दुख जताते हुए नेपाल की जनता के प्रति एकजुटता और संवेदना व्यक्त की।
44 देशों ने कहा कि हाल के दिनों में हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण हिमस्खलन और चट्टानों के खिसकने से भीषण बाढ़ आई, जिससे बड़े पैमाने पर जन-धन का नुकसान हुआ। उन्होंने नेपाल के लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए जलवायु संकट से प्रभावित देशों को समर्थन देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सम्मेलन में अल्पविकसित देशों में जलवायु परिवर्तन से होने वाली हानि और नुकसान की भरपाई के लिए अनुदान आधारित संसाधनों समेत गुणवत्तापूर्ण जलवायु वित्त तक आसान और बढ़ी हुई पहुंच की मांग की गई।
घोषणापत्र में कहा गया कि जलवायु संकट के कारण गरीब और अल्पविकसित देश पूंजी की ऊंची लागत तथा भारी कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं। ऐसे में मौजूदा जलवायु वित्त व्यवस्था में व्यापक बदलाव की जरूरत है।
44 देशों ने उन देशों से जलवायु संकट से होने वाले नुकसान की भरपाई करने की मांग की, जो ऐतिहासिक रूप से अधिक कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार रहे हैं। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ रहा है, जिनका वैश्विक उत्सर्जन में योगदान अपेक्षाकृत कम है।
अल्पविकसित देशों ने वर्ष 2035 तक जलवायु संबंधी वित्तीय सहायता बढ़ाकर सालाना कम से कम 128 अरब अमेरिकी डॉलर करने की मांग की है। इसके साथ ही वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने के लक्ष्य को और प्रभावी तरीके से लागू करने पर भी जोर दिया गया।
देशों ने अपने कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के प्रयासों और योगदान के अनुरूप जलवायु अनुकूल तकनीक तथा निवेश के अवसर उपलब्ध कराने की मांग भी की। सम्मेलन में स्पष्ट किया गया कि जलवायु संकट से निपटने के लिए विकासशील और अल्पविकसित देशों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना वैश्विक समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

