लेबनान ने यूनेस्को से 5 प्राचीन किलों की सुरक्षा की अपील की
बेरूत, 08 जुलाई (हि.स./रिया नोवोस्ती)। लेबनान ने अपने देश के दक्षिण स्थित पांच प्राचीन किलों को 'विश्व धरोहर' सूची में शामिल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) से तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया है। यह कदम इज़राइल-लेबनान संघर्ष के दौरान ऐतिहासिक धरोहरों को हो रहे नुकसान को देखते हुए उठाया गया है।
लेबनान के संस्कृति मंत्री घसन सलामेह ने कहा, हमने विश्व धरोहर समिति से 'जबल आमेल' के पांच किलों को तत्काल विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का अनुरोध किया है। इस समिति की बैठक 17 जुलाई को दक्षिण कोरिया में होनी है।
सलामेह ने कहा कि जबल आमेल क्षेत्र के पांच ऐतिहासिक किलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का अनुरोध इसलिए किया गया है ताकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मिल सके। उन्होंने बताया कि इनमें से कई स्थलों को इज़राइली सैन्य कार्रवाई के दौरान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नुकसान पहुंचा है।
मंत्री के अनुसार, दक्षिणी लेबनान स्थित शमा मकबरे को गंभीर क्षति हुई है। उसके तीन गुंबद ढह चुके हैं, जबकि चौथा भी गिरने की कगार पर है। वहीं, ब्यूफोर्ट कैसल को लेकर इज़राइली सेना के उस दावे ने भी चिंता बढ़ा दी, जिसमें कहा गया था कि किले के नीचे सुरंगें मौजूद हैं। लेबनानी अधिकारियों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित सुरंगें किले से लगभग 700 मीटर (0.4 मील) दूर स्थित हैं और इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जन-जागरूकता एवं राजनयिक अभियान भी चलाया गया।
उनके मुताबिक, टायर के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल स्थित प्राचीन रोमन स्तंभ का ऊपरी हिस्सा उड़ गया, नबातीह के ममलुक कालीन बाज़ार को भारी क्षति पहुंची और सीमा से लगे सदियों पुराने कई गांव ध्वस्त कर दिए गए। उन्होंने कहा कि संघर्ष विराम के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों का पूरा आकलन अभी संभव नहीं है क्योंकि इज़राइली सेना अब भी दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों में मौजूद है। उनके अनुसार, कब्जे वाले इलाके में कई ऐतिहासिक गांव, धार्मिक स्थल और मध्ययुगीन ब्यूफोर्ट कैसल भी शामिल हैं।
सलामेह ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत केवल रोमन या फीनिशियन अवशेषों तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें ऐतिहासिक इमारतें, पुरातात्विक स्थल और सांस्कृतिक महत्व की संरचनाएं भी शामिल हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते संरक्षण नहीं मिला तो लेबनान की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
हालांकि, इज़राइली सेना ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य नागरिक बुनियादी ढांचे या सांस्कृतिक स्थलों को नुकसान पहुंचाना नहीं है। सेना का कहना है कि वह केवल सैन्य जरूरत के तहत कार्रवाई करती है और संवेदनशील स्थलों के संबंध में विशेष मंजूरी प्रक्रिया अपनाई जाती है।
इससे पहले यूनेस्को भी टायर और दक्षिणी लेबनान के अन्य ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता चुका है। संगठन ने सांस्कृतिक धरोहरों पर हमलों की निंदा करते हुए उनके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया है।-------------------
हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

