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इज़राइल-लेबनान वार्ता का अगला दौर वाशिंगटन में, रोम की बैठक अक्टूबर तक टली

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इज़राइल-लेबनान वार्ता का अगला दौर वाशिंगटन में, रोम की बैठक अक्टूबर तक टली


वाशिंगटन, 12 सितंबर (हि.स.)। इज़राइल-लेबनान के बीच जारी बातचीत के अगले दौर की तारीख और जगह में बदलाव किया गया है। रोम में अगले हफ्ते होने वाली बैठक अब अक्टूबर तक टाल दी गई है, जबकि दोनों देशों के राजदूत वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्रालय में मुलाकात करेंगे। इस बैठक में जून के फ्रेमवर्क समझौते को लागू करने और इज़राइली सेना की लेबनान से वापसी पर चर्चा होगी।

तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू

ने अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि बैठक में जून में हुए समझौते से जुड़े घटनाक्रम और उसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी। औपचारिक वार्ता का अगला दौर अब अक्टूबर में रोम में होने की संभावना है।

वहीं, इस मामले में एक सूत्र के मुताबिक, यहूदी धार्मिक छुट्टियों, लेबनानी सशस्त्र बलों के समर्थन में होने वाले पेरिस कॉन्फ्रेंस और संयुक्त राष्ट्र महासभा की तैयारियों के कारण प्रमुख प्रतिभागियों का अगले सप्ताह रोम में जुटना संभव नहीं था। वहीं, बैठक की योजना में बदलाव को लेकर अभी इज़राइल या लेबनान की सरकार की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

इज़राइल और लेबनान के बीच अप्रैल से अब तक सीधे बातचीत के सात दौर हो चुके हैं। इनमें पांच बैठकें वाशिंगटन और दो रोम में हुईं। छठे दौर की बातचीत में इज़राइली सेना की वापसी शुरू करने के लिए दो “पायलट क्षेत्रों” की पहचान को लेकर शुरुआती सहमति बनी थी। प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत लेबनानी सेना की तैनाती के बदले इज़राइल को कब्जे वाले लेबनानी क्षेत्रों से चरणबद्ध तरीके से पीछे हटना है।

वार्ता में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब लेबनानी सेना ने बुधवार को दावा किया कि 26 जून को फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से इज़राइल ने करीब 7,700 बार समझौते का उल्लंघन किया है। लेबनानी सेना ने चेतावनी दी कि लगातार हो रहे कथित उल्लंघन मौजूदा समझौतों और सुरक्षा व्यवस्थाओं के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।

फ्रेमवर्क समझौते में दक्षिणी लेबनान में लेबनानी सेना की तैनाती के साथ इज़राइली सेना की क्रमिक वापसी का प्रावधान है। इसकी शुरुआत दो पायलट क्षेत्रों में एक मॉडल के तौर पर किए जाने की योजना है।

इज़राइल दक्षिणी लेबनान के कुछ क्षेत्रों में लंबे समय से मौजूद है, जबकि 2023-24 के युद्ध के बाद उसकी सैन्य मौजूदगी कुछ अन्य इलाकों में भी बढ़ी है। इस बीच, लेबनानी क्षेत्र में इज़राइली हमले और सैन्य गतिविधियां जारी रहने से दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।

दूसरी ओर, लेबनानी रेजिस्टेंस ग्रुप हिज़्बुल्लाह ने बातचीत का लगातार विरोध किया है और लेबनानी सरकार से वार्ता रोकने की अपील की है। ऐसे में अक्टूबर में प्रस्तावित रोम वार्ता से यह स्पष्ट होगा कि दोनों पक्ष फ्रेमवर्क समझौते को लागू करने की दिशा में कितना आगे बढ़ पाते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी