अल साल्वाडोर के लोगों के लिए अमेरिकी दूतावास की कठोर चेतावनी
वाशिंगटन (अमेरिका), 08 नवंबर (हि.स.)। संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की डेमोक्रेट के हाथों करारी हार के दो दिनों बाद अल साल्वाडोर में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया पर सख्त चेतावनी जारी की। इस पोस्ट में लिखा गया, अमेरिका के आव्रजन (इमिग्रेशन) कानून अभी भी लागू हैं। मध्यावधि चुनाव के नतीजों का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा आव्रजन नीति में कोई बदलाव हुआ है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इस चेतावनी के बावजूद डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत की लहर ने शायद कुछ प्रवासियों को अमेरिका तक का जोखिम भरा सफर शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इस हफ्ते होंडुरास और अल साल्वाडोर से अमेरिका की ओर बड़ी संख्या में प्रवासी रवाना हुए हैं। कुछ लोगों ने बताया कि कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का बहुमत है। उन्हें लगता है कि अब अमेरिका पहुंचना आसान हो जाएगा। सीमा तक पहुंचे कई लोगों ने अपनी पहचान गुप्त रखने का अनुरोध किया।
अल साल्वाडोर से अपने पति और नौ व 11 साल के बच्चों के साथ सफर कर रही महिला ने कहा कि हमें उम्मीद है कि हम अपनी मंजिल तक पहुँच पाएंगे। इस महिला समेत अल साल्वाडोर के दर्जनों अन्य लोग शुक्रवार को सैन साल्वाडोर के वेस्टर्न बस टर्मिनल से ग्वाटेमाला-मेक्सिको सीमा पर स्थित टेकुन उमान के लिए रवाना हुए।
दरअसल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले के साथ ट्रंप के मजबूत व्यक्तिगत रिश्ते हैं। बुकेले ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ आव्रजन नियंत्रण पर समझौता किया है।
इस समझौते के तहत अमेरिकी सरकार अल साल्वाडोर को भारतीय मुद्रा के हिसाब से लगभग 56 करोड़ 34 लाख 63 हजार रुपये सालाना का भुगतान कर रही है। ताकि वह अमेरिका से निर्वासित किए गए विदेशी नागरिकों को अपनी कुख्यात मेगा-जेल (आतंकवाद कारावास केंद्र) में रख सके। ट्रंप ने 1798 के ऐतिहासिक 'एलियन एनिमीज एक्ट' का सहारा लेकर सैकड़ों आपराधिक गिरोहों के सदस्यों को अदालती आदेशों के बावजूद अल साल्वाडोर भेजा है। सरकार ने गंभीर अपराधों में शामिल कुछ अमेरिकी नागरिकों को भी वहां की जेलों में भेजने की इच्छा जताई है, जिस पर कानूनी विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद

