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कांगो में इबोला का प्रकोप तेज, डब्ल्यूएचओ ने चेताया- स्वास्थ्य व्यवस्था को तत्काल मजबूत करने की जरूरत

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जिनेवा, 01 अगस्त (हि.स.)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने शनिवार को चेतावनी दी कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआर कांगो) में इबोला वायरस का मौजूदा प्रकोप असाधारण गति से फैल रहा है और इसे नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था को तत्काल व्यापक स्तर पर मजबूत करने की आवश्यकता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 15 मई को घोषित यह प्रकोप अब देश के इतिहास का सबसे बड़ा इबोला संक्रमण बन चुका है। 30 जुलाई तक 3,605 पुष्ट मामलों की पुष्टि हुई है, जबकि 1,587 लोगों की मौत हो चुकी है। इस प्रकार संक्रमण की मृत्यु दर लगभग 44 प्रतिशत दर्ज की गई है।

यह प्रकोप इबोला वायरस के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैला है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों के संपर्क से फैलता है और गंभीर रक्तस्रावी बुखार का कारण बनता है।

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि संक्रमण का केंद्र उत्तर-पूर्वी इतुरी प्रांत है, जिसकी सीमाएं दक्षिण सूडान और युगांडा से लगती हैं। संक्रमण अब उत्तर किवु और दक्षिण किवु सहित चार अन्य प्रांतों में भी फैल चुका है, जहां कई क्षेत्रों पर सशस्त्र समूहों का प्रभाव है। ऐसे हालात राहत और चिकित्सा कार्यों को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि सुरक्षा संबंधी चुनौतियां, बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन और सीमापार आवाजाही संक्रमण के भौगोलिक विस्तार का जोखिम बढ़ा रही हैं। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समन्वित प्रयासों और अतिरिक्त संसाधनों के साथ स्वास्थ्य प्रतिक्रिया को तेज करने की अपील की है।

इसी बीच, सिंगापुर स्थित हिलेमैन लेबोरेटरीज ने बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ संभावित टीका विकसित करने की घोषणा की है। वहीं, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एक अन्य प्रायोगिक वैक्सीन का क्लीनिकल परीक्षण भी शुरू हो चुका है, जिसके तहत पहले स्वयंसेवक को टीका लगाया जा चुका है।

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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय