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मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे में पीपुल-टू-पीपुल संवाद पर जोर

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मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे में पीपुल-टू-पीपुल संवाद पर जोर


- संघ प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर बोले- सामुदायिक नेताओं के कार्यक्रम को 310 संगठनों का मिल रहा समर्थनलंदन, 04 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत दो से सात सितंबर तक ब्रिटेन के दौरे पर हैं। संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के अनुसार इस यात्रा के दौरान 100 से अधिक संगठनों ने भागवत का स्वागत किया है और उनके विभिन्न कार्यक्रमों में सहयोग कर रहे हैं। सामुदायिक नेताओं के लिए आयोजित होने वाले एक प्रमुख कार्यक्रम को 310 संगठनों का समर्थन प्राप्त है।

आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर हो रहा यह दौरा ब्रिटेन स्थित संगठन ‘इंटीग्रल’ के निमंत्रण पर आयोजित किया गया है। आंबेकर ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि सरकारों के बीच कूटनीतिक संवाद अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने के लिए लोगों के बीच सीधे संपर्क और संवाद भी आवश्यक है। उनके अनुसार, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करने से आपसी समझ को व्यापक आधार मिल सकता है।

आंबेकर ने कहा कि आरएसएस संस्कृति और सभ्यता के आधार पर काम करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है और वैश्विक स्तर पर इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि भागवत का ब्रिटेन दौरा सरकारों के स्तर पर होने वाले संवाद के साथ-साथ ‘पीपुल-टू-पीपुल’ और ‘कल्चर-टू-कल्चर’ संपर्क को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

हिंदुत्व की पश्चिमी समझ पर आरएसएस की आपत्ति

हिंदुत्व की पश्चिमी अकादमिक समझ को लेकर पूछे गए सवाल पर आंबेकर ने कहा कि इसके बारे में कई गलत धारणाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत को केवल आधुनिक राजनीतिक राष्ट्र-राज्य की अवधारणा के आधार पर नहीं समझा जा सकता, बल्कि इसकी एक व्यापक सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान भी है।

आंबेकर ने कहा कि हिंदुत्व को किसी एक धर्म तक सीमित अवधारणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, इसमें विभिन्न धर्मों और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान तथा सत्य में विश्वास जैसे विचार शामिल हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि मोहन भागवत की ब्रिटेन यात्रा के दौरान होने वाले संवाद से भारत की सांस्कृतिक अवधारणा और हिंदुत्व को लेकर मौजूद धारणाओं को समझने में मदद मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुलकर्णी