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बलोचिस्तान में पाकिस्तान के सैन्य वाहनों पर फायरिंग, हमले में बड़ी संख्या में सैनिकों के मारे जाने का दावा

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बलोचिस्तान में पाकिस्तान के सैन्य वाहनों पर फायरिंग, हमले में बड़ी संख्या में सैनिकों के मारे जाने का दावा


इस्लामाबाद, 09 सितंबर (हि.स.)। पाकिस्तान के बलोचिस्तान के खारान और पंजगुर जिलों में पाकिस्तान की सेना के वाहनों को निशाना बनाया गया है। हथियारबंद लोगों के इस हमले में बड़ा विस्मयकारी दावा किया गया है। इस दावे के अनुसार, हमले में 1,000 सैन्यकर्मी मारे गए या घायल हुए। इस दावे पर पाकिस्तान सरकार या संघीय सेना ने अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है। अभी तक किसी संगठन ने भी इस तरह के हमले की जिम्मेदारी ली है।

द बलोचिस्तान पोस्ट की 08 सितंबर की शाम जारी रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय सूत्रों ने बताया कि हथियारबंद लोगों ने शाम को खारान शहर के पास पाकिस्तान की सेना की गाड़ियों को निशाना बनाया। सूत्रों का कहना है कि हमले के दौरान सेना की कम से कम तीन गाड़ियों पर सीधी फायरिंग हुई। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हमले में लगभग 1,000 सैन्यकर्मी मारे गए या घायल हुए। अधिकारियों की ओर से घटना, हताहतों या हमले के बारे में तुरंत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

इस बीच, पंजगुर जिले के प्रोम इलाके में बंदूकधारियों ने पाकिस्तान की सेना के लिए राशन ले जा रही एक गाड़ी में आग लगा दी। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान हथियारबंद लोगों ने एक और गाड़ी पर भी कब्जा कर लिया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हथियारबंद लोगों ने पंजगुर के चिडगी इलाके में एक रिहायशी इलाके में आग लगाने की घटना में पाकिस्तान की सेना द्वारा लगाए गए सर्विलांस कैमरों को नष्ट कर दिया। इन हमलों की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है। हालांकि बलोच आजादी समर्थक संगठन ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी लेते रहे हैं।

द बलोचिस्तान पोस्ट की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के मीडिया विंग के पूर्व में जारी आंकड़ों के मुताबिक, बीएलए ने पाकिस्तान के सुरक्षा बलों, सैन्य ठिकानों और वाहनों को निशाना बनाते हुए 500 से अधिक हमले किए। इनमें 1,000 से अधिक सैनिकों के मारे जाने या गंभीर रूप से घायल हुए। वर्ष 2026 में मस्तुंग, क्वेटा, कलात, और बोलन में व्यापक टकराव देखा गया है। बीएलए के फतह स्क्वायड और अन्य विशेष शाखाओं ने संघीय सरकार के सैन्य काफिलों को निशाना बनाकर कई घातक हमले किए हैं। इन हमलों में जियारत क्रॉस और सूराब क्षेत्रों में कई पाकिस्तानी जवानों के मारे जाने का दावा किया गया।

पाकिस्तान सरकार और सेना (आईएसपीआर) आमतौर पर बलोच विद्रोही गुटों के दावों को खारिज करती है या हताहतों की बहुत कम संख्या बताती है। पाकिस्तान के सुरक्षा बल भी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चला रहे हैं। इन अभियानों में सैकड़ों बलोच लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया गया है। संघर्ष क्षेत्र होने और मीडिया पर कड़े प्रतिबंधों के कारण, दोनों पक्षों (बीएलए और पाकिस्तान की सेना) के हताहतों के इन बड़े आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना बेहद कठिन है।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बलोचिस्तान निवासी इमरान अली को जबरन गायब किए जाने और उसकी न्यायेतर हत्या को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए पाकिस्तान से मामले की त्वरित एवं निष्पक्ष जांच करने का आग्रह किया है। बताया गया है कि पिछले साल 27 अगस्त को पाकिस्तान के आतंकवाद रोधी विभाग के करीब 20 अधिकारियों ने अली को उसके अपार्टमेंट से कथित तौर पर अगवा कर लिया था और वे उसे किसी अज्ञात स्थान पर ले गए थे। अली के परिवार को एक साल तक इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई कि वह कहां है और उसके साथ क्या हुआ। हालांकि, अली के साथ हिरासत में लिए गए कुछ लोगों ने रिहा होने के बाद पुष्टि की कि उसे हिरासत में रखा गया था।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की विज्ञप्ति में कहा गया कि हिरासत के दौरान अली को कई दिनों तक कथित तौर पर यातनाएं दी गईं।

विशेषज्ञों ने कहा, ''अगर किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद अधिकारी यह मानने से इनकार कर दें कि वह उनकी हिरासत में है, या उसके बारे में अथवा उसके ठिकाने की जानकारी छिपाएं, तो इसे जबरन गायब किया जाना माना जाता है। ऐसी स्थिति में पीड़ित कानून के संरक्षण से बाहर हो जाता है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के एक अनिवार्य सिद्धांत का उल्लंघन है।''

जबरन गायब किए जाने के मामलों को देखने वाले पाकिस्तान के जांच आयोग के समक्ष पिछले माह हुई सुनवाई के दौरान पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि अली की मई 2026 में एक कथित मुठभेड़ में मौत हो गई थी। अधिकारियों को उसके शव की शिनाख्त करने में करीब एक महीने का समय लगा। अधिकारियों ने दावा किया कि वे अली के शव को सुरक्षित नहीं रख सके और इसलिए जून 2026 में उसे दफना दिया गया।

इस खुलासे के बाद अली का परिवार क्वेटा के सिविल अस्पताल पहुंचा, जहां परिजनों ने अस्पताल के रिकॉर्ड में मौजूद तस्वीरों के आधार पर शव की शिनाख्त की। अली का शव कथित तौर पर छह अन्य शवों के साथ अस्पताल लाया गया था। अस्पताल के कर्मचारियों या पुलिस ने इनमें से किसी भी शव के संबंध में कोई दस्तावेज तैयार नहीं किया और न ही उनकी सूचना दर्ज की। इन शवों को शिनाख्त किए बिना और उनके परिवारों को सूचित किए बिना दफना दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा, ''बलोचिस्तान में इन मामलों को देखते हुए गंभीर आशंका है कि अन्य शव भी जबरन गायब किए गए लोगों के हो सकते हैं।''

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद